देहरादून। राजधानी देहरादून में MBBS दाखिले में हुए बड़े फर्जीवाड़े की जांच कर रही विशेष जांच टीम को एक बेहद चौंकाने वाले जासूसी तंत्र का सामना करना पड़ा है। जांच एजेंसियों द्वारा संदिग्धों से की जा रही पूछताछ, कार्रवाई और उनके ठिकानों की पल-पल की जानकारी पुलिस की कार्रवाई से पहले ही आरोपी गिरोह तक पहुंच रही है। संदिग्धों के मोबाइल फोन खंगालने पर मिले इनपुट के बाद SIT अब थाने और चौकियों का ठिकाना बदलकर पूछताछ करने पर मजबूर हो गई है।
पत्रकार अंकित कुमार चौधरी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मेडिकल एडमिशन स्कैम में गिरोह के गुर्गे SIT की हर गतिविधि पर बारीक नजर बनाए हुए थे। हिरासत में कौन संदिग्ध है, उससे कहां पूछताछ हो रही है और किसे छोड़ा जा रहा है, यह तमाम गुप्त जानकारियां तुरंत लीक की जा रही थीं। बार-बार स्थान बदलने के बावजूद जब गोपनीय सूचनाएं बाहर पहुंचती रहीं, तो देहरादून पुलिस के आला अधिकारी भी सन्न रह गए।
पुलिसिया तंत्र की इस निगरानी का खुलासा मुख्य आरोपी रूपेश पंडित से पूछताछ के दौरान हुआ। रूपेश को जब देहरादून के रायपुर थाने लाया गया, तब थाने के बाहर कई संदिग्ध चक्कर काटते पाए गए। इसके बाद जब SIT ने रणनीति बदलकर दूसरे संदिग्धों को किसी नए स्थान पर बुलाया, तो ताज्जुब की बात यह रही कि उस नए ठिकाने की भनक भी गिरोह को पहले से ही लग चुकी थी।
SIT की इस पड़ताल में फर्जी प्रमाणपत्रों के खेल की परतें भी लगातार खुल रही हैं। मामले में अब तक 3 मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि जिला स्तर पर 778 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच जारी है। दाखिले के नाम पर ऐंठे गए कुल 60 लाख रुपये में से 13.58 लाख रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं। इसमें मुख्य आरोपी रूपेश पंडित के मेरठ स्थित घर से 8 लाख रुपये और आरोपी धीरज श्रीवास्तव की कार से 5.58 लाख रुपये बरामद हुए हैं।
मामले में तहसील स्तर पर मजबूत पैठ रखने वाला एक प्रमुख बिचौलिया अभी भी फरार है। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपी धीरज श्रीवास्तव के साथी ने कम मेरिट वाले छात्रों को ‘फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे’ का इस्तेमाल कर फर्जी दाखिला दिलाने की तरकीब सुझाई थी। उसी के जरिए कचहरी व तहसील के उस प्रभावशाल व्यक्ति से संपर्क साधा गया था, जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
SIT प्रभारी एसपी जया बलोनी ने स्पष्ट किया है कि जासूसी तंत्र का खुलासा होने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब कार्रवाई केवल एडमिशन फर्जीवाड़े के आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पुलिस विभाग या तंत्र में मौजूद उन भेदियों की भी पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो जांच की गोपनीय सूचनाएं गिरोह को लीक कर रहे थे।

