उत्तराखंड के बेसिक और जूनियर सरकारी स्कूलों से बच्चों का मोहभंग होना शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में महज एक साल के भीतर छात्र संख्या में भारी गिरावट आई है, जहाँ वर्ष 2025-26 के मुकाबले इस साल करीब 59 हजार छात्र कम हो गए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष पहली से आठवीं कक्षा तक 5,17,578 छात्र रजिस्टर्ड थे, जो इस वर्ष घटकर केवल 4,57,584 रह गए हैं। छात्रों की संख्या घटने के कारण भोजनमाताओं की संख्या भी 25,013 से घटकर 23,829 हो गई है।
इस लगातार घटती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने मिड-डे मील के बजट में कटौती करते हुए इस वर्ष के लिए 225.50 करोड़ रुपये की ही सहमति दी है, जो पिछले साल 246.18 करोड़ रुपये थी। जहाँ शिक्षा विभाग कक्षा आठवीं पास कर छात्रों के नौवीं में जाने को इसका कारण बता रहा है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि प्राथमिक कक्षाओं में नए एडमिशन नहीं हो रहे हैं।
इसके अलावा, रजिस्टर्ड छात्रों और वास्तव में मिड-डे मील खाने वाले बच्चों की संख्या में भी लगभग 30% का बड़ा अंतर देखा गया है, जिस पर केंद्र सरकार ने गहरी नाराजगी जताई है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा गठित कमेटी ने स्कूलों में कक्षावार शिक्षकों की कमी, बुनियादी संसाधनों का अभाव, अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई न होना और प्री-प्राइमरी कक्षाओं की कमी जैसे मुख्य कारणों को जिम्मेदार ठहराया है, जिन्हें सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।

