डीजल की अचानक से असामान्य मांग और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब एक वाहन को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही मिल पाएगा। साथ ही व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के पेट्रोल पंप से सीधे डीजल-पेट्रोल खरीदने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, यह बंदिश 90 दिन तक लागू रहेगा।
गौरतलब है कि पेट्रोल पंप और व्यावसायिक बिक्री के दामों में भारी अंतर के कारण डीजल की कालाबाजारी जोरों पर थी। पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि व्यावसायिक बिक्री के लिए तेल कंपनियां डीजल 134.50 रुपये प्रति लीटर बेच रही हैं। प्रति लीटर 39 रूपए 30 पैसे का फायदा देख कई ट्रांसपोर्टर और औद्योगिक इकाइयां पेट्रोल पंप से सस्ता डीजल खरीदकर उसे ऊंचे दामों पर बेच रही थीं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मई माह में 327 जिलों में डीजल की बिक्री में दस फीसद का इजाफा हुआ है। जबकि 80 जिलों में 30 फीसदी से अधिक की असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह वृद्धि वास्तविक खपत नहीं, बल्कि जमाखोरी और कालाबाजारी के चलते बढ़ी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डीजल की कालाबाजारी होने से तेल कंपनियों को रोजाना 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।
नए नियमों के मुताबिक कोई भी वाहन एक दिन में एक पेट्रोल पंप से 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं भरवा सकेगा। एक से ज्यादा बार डीजल लेने पर भी कुल सीमा 200 लीटर ही रहेगी। पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को किसी दूसरे को बेचना या ट्रांसफर करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। पकड़े जाने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
जबकि बल्क कंज्यूमर यानी बड़ी कंपनियां, फैक्ट्री, माइंस और ट्रांसपोर्ट कंपनियां अब पेट्रोल पंप से डीजल नहीं खरीद पाएंगी। उन्हें सीधे तेल कंपनियों के डिपो से 134.50 रुपये प्रति लीटर की दर पर ही खरीदना होगा। अभी यह प्रतिबंध फिलहाल 90 दिन के लिए है।

