देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी के ड्रिल स्क्वायर पर जैसे ही जेंटलमैन कैडट्स का अंतिम पग पड़ा मां भारती मुस्करा उठी। मुल्क के हौसले में इजाफा हुआ. हिंदुस्तान की सरहद और मजबूत हुई। भारत की सेना को 481 जांबाज सैन्य अफसर मिले और भारत मां को अपने सच्चे सपूत।

हालांकि मित्र देशों के 16 जेंटलमैन कैडट्स को भी आईएमए देहरादून में तराशा गया है जो अब अपने देश की सेना में शामिल हो कर अफसर बन जाएंगे। कुछ मिला कर 515 कैडेटस ने आज कदमताल की और अपने लक्ष्य को हासिल किया। ये मुल्क के ऐसे बहादुर बेटे हैं जो सिर्फ सरहद की हिफाजत ही नहीं करेंगे बल्कि, जब भी देश के भीतर उनकी इस्पाती बाजुओं की दरकार होगी या एआई से भी तेज सोचने समझने और निर्णय की क्षमता की जरूरत पड़ेगी।

ये जांबाज अफसर अपने हौंसलों के साथ मौजूद रहेंगे। सरहद की हिफाजत के लिए अपने फौलादी सीने को आगे करने वाले ये नौजवान जैटलमैन कैडट से अब जांबाज अफसर बन गए हैं। बहरहाल देहरादून का IMA आज खुशियों से गुलजार था। आईएमए के आंगन में 481 भारतीय अभिभावकों के सपने सच हो उठे थे। उनकी परवरिश ने अपना परिणाम दिखाया।

दरअसल कल तक जो उनके बच्चे थे आज अंतिम पग रखते ही मां भारती के सपूत बन गए थे। माता-पिता ने जेटलमैन से अफसर बने अपने बच्चों के कांधों पर उनकी मेहनत के स्टार सजाए। आईएमए की ट्रेनिंग में लोहे से भी मजबूत बन चुके कंधों पर मुल्क की हिफाजत की जिम्मेदारी से भरपूर चमकते सितारे रखे।

बेटे और बेटियों की कामयाबी से भरे माहौल में आईएमए परिसर गुलजार हो उठा, तो माता पिता भावुक, किसी मां की आंख से खुशियों के आंसू निकल पड़े तो किसी पिता की आवाज सपना सच होता देख भर्रा उठी। यकीनन देश की महामहिम द्रोपदी मुर्मू को भी आज उस वक्त फख्र महसूस हुआ होगा जब उन्होने भारत मांता की उन 9 बेटियों की सलामी ली होगी जो अब सरहद की चौकसी बिजली से भी तेज रफ्तार से करेंगी।

ये आईएमए के इतिहास में पहला मौका है जब बेटियों ने भी बेटों के साथ कदमताल कर अतिम पग रखा और भारतीय सेना की अफसर बन गई। साहसी 9 बेटियों का राष्ट्रीय रक्षा अकदमी में ये पहला बैच था। जिन्हें आईएमए ने तराश कर मुल्क के दुश्मन के लिए महिषमर्दनी बना दिया है।


