उत्तराखंड में मानसून से पहले हाईवे पर तैनात होंगी 114 भारी मशीनें, PWD ने चिन्हित किए 57 खतरनाक लैंडस्लाइड जोन

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उत्तराखंड में आगामी मानसून की दस्तक से पहले लोक निर्माण विभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग विंग ने पहाड़ी रास्तों पर यातायात को सुचारू रखने और चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। बरसात के दौरान भूस्खलन और भू-धंसाव से बंद होने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों को तुरंत खोलने के लिए विभाग इस बार हाईवे पर 114 जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात करने जा रहा है।

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एनएच के मुख्य अभियंता मुकेश परमार के अनुसार, पिछले साल तैनात की गई 90 मशीनों के मुकाबले इस बार कहीं अधिक मजबूत तैयारी की गई है। विभाग ने राज्य के 18 राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए 57 संवेदनशील भूस्खलन और भू-धंसाव जोन को चिन्हित किया है, जहां मानसून में सबसे अधिक खतरा रहता है।

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इन संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क बंद होते ही बिना समय गंवाए तत्काल मलबा हटाने और यातायात बहाल करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। मुख्य रूप से गंगोत्री हाईवे पर नालू पानी, धरासू बैंड और गंगोरी; यमुनोत्री हाईवे पर बड़कोट से जानकीचट्टी के बीच; और बदरीनाथ हाईवे के कई स्लाईड जोन को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है।

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ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत फरासू, स्वाला, चंदार और क्वारा जैसे खतरनाक मुख्य स्लाइड जोन का ट्रीटमेंट होने से स्थिति में पहले से सुधार हुआ है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने न केवल नेशनल हाईवे, बल्कि स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर भी लोक निर्माण विभाग की ओर से इसी तरह मशीनों की पुख्ता व्यवस्था करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।