चंपावत में वीरान पड़ी सरकारी जमीनों और भवनों का होगा कायाकल्प, खुलेंगी लाइब्रेरी, आंगनबाड़ी और रोजगार केंद्र

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चंपावत। उत्तराखंड के चंपावत जिले में अब सालों से बेकार पड़ी सरकारी जमीनें और खाली पड़े भवन लावारिस नहीं रहेंगे। जिला प्रशासन ने इन परिसंपत्तियों को जनहित के कार्यों में इस्तेमाल करने का एक बड़ा और मॉडल फैसला लिया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार की इस पहल के तहत अनुपयोगी सरकारी संपत्तियों पर युवाओं के लिए लाइब्रेरी, बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र और महिलाओं के लिए रोजगार उत्पादन केंद्र शुरू किए जाएंगे।

जिला सभागार में सभी विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने इस मास्टर प्लान की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मौजूद ऐसी सभी संपत्तियों का एक विस्तृत लेखा-जोखा तुरंत तैयार करें, जो वर्तमान में बंद, जर्जर या अनुपयोगी स्थिति में पड़ी हुई हैं।

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प्रशासन की योजना इन संपत्तियों का स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बहुउद्देशीय इस्तेमाल करने की है। खाली पड़े भवनों में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए बिक्री व भंडारण केंद्र, मशरूम उत्पादन केंद्र, बच्चों के लिए आधुनिक आंगनबाड़ी और युवाओं की पढ़ाई के लिए पुस्तकालय स्थापित किए जाएंगे। इससे न केवल सरकारी संपत्ति की बर्बादी रुकेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए साधन भी विकसित होंगे।

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योजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिलाधिकारी ने सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों को आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा कर व्यावहारिक और धरातलीय प्रस्ताव तैयार करें, ताकि इन भवनों को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाकर आम जनता को समर्पित किया जा सके।

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चंपावत जिला प्रशासन की इस अनूठी पहल से जहां एक ओर वीरान पड़े सरकारी ढांचे फिर से आबाद होंगे, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी। सभी विभागों द्वारा लेखा-जोखा सौंपे जाने के बाद प्रशासन चरणबद्ध तरीके से इन परिसंपत्तियों का कायाकल्प शुरू करेगा।