टिहरी। उत्तराखंड के टिहरी जिला स्थित नैलचामी क्षेत्र के ग्राम थाती में ग्रामीण पिछले 26 वर्षों से सड़क निर्माण पूरा होने, डामरीकरण और अपनी अधिग्रहित भूमि के मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। लोक निर्माण विभाग घनसाली की लापरवाही के कारण थाती-चिरबटिया मोटर मार्ग आज तक अपने अंतिम गंतव्य तक नहीं पहुंच सका है, जिससे क्षेत्र की बड़ी आबादी मूलभूत आवागमन की सुविधाओं से वंचित है।
मामला थाती-चिरबटिया मोटर मार्ग का है, जहां ढाई दशक पहले यानी करीब 26 साल पूर्व सड़क निर्माण के लिए कटिंग का काम शुरू किया गया था। शुरुआती काम के बाद से अब तक न तो सड़क को चिरबटिया तक जोड़ा जा सका और न ही बिछाए गए रास्ते पर डामरीकरण का काम हुआ। ग्रामीण आज भी पत्थरों और बदहाल रास्ते पर सफर करने को मजबूर हैं।
सड़क अधूरी रहने के साथ-साथ भूमि कटान का मुआवजा न मिलना ग्रामीणों के गुस्से की बड़ी वजह है। ग्रामीणों का कहना है कि 26 साल पहले सड़क कटिंग के दौरान उनकी उपजाऊ और निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया था। विभाग ने तब मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी घनसाली की ओर से आज तक प्रभावितों को एक रुपया भी मुआवजा नहीं दिया गया है।

स्थानीय ग्राम प्रधान बिष्ट ने इस पूरे मामले में पीडब्ल्यूडी घनसाली की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्राम प्रधान के मुताबिक, सड़क को पूरा कराने और मुआवजा दिलाने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
ग्राम प्रधान ने विभाग की टेंडर प्रक्रिया को भी कटघरे में खड़ा किया है। उनका कहना है कि इस सड़क के डामरीकरण और निर्माण के लिए दो बार टेंडर निकाले गए, लेकिन दोनों ही बार टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। ग्राम प्रधान ने आरोप लगाया कि टेंडर रद्द होने के पीछे विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच की अंदरूनी सांठगांठ है।
26 सालों की लंबी अनदेखी के बाद अब नैलचामी क्षेत्र के ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे रहा है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में मांग की है कि थाती-चिरबटिया मार्ग का कटिंग कार्य चिरबटिया तक तुरंत पूरा किया जाए, पक्का डामरीकरण हो और लंबित भूमि मुआवजा जल्द दिया जाए। अब देखना होगा कि 26 साल से अधूरी इस सड़क को विभाग कब तक मंजिल तक पहुंचा पाता है।

