बागेश्वर। बागेश्वर जिले के प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर लंबे समय से नौकरी कर रहे 10 शिक्षकों की सेवाएं शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और यह गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि नियुक्ति के वक्त इनके प्रमाण पत्रों का सत्यापन किस प्रक्रिया से हुआ था।
मामले की पुष्टि करते हुए बागेश्वर के प्रभारी डीईओ बेसिक आशाराम ने बताया कि रामनगर बोर्ड से कराए गए सत्यापन के दौरान प्राथमिक स्कूलों के इन दस शिक्षकों के प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाए गए। रिपोर्ट सामने आते ही शिक्षा विभाग ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी की सेवाएं समाप्त कर दीं।
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इन सभी आरोपी शिक्षकों की जॉइनिंग जनवरी 2026 में हुई थी और विभाग की तरफ से इन्हें आठ महीने का वेतन भी मिल चुका था। इतने लंबे समय तक फर्जीवाड़े के बावजूद विभाग की नजरों से बचे रहने पर अब सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग द्वारा जिन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है, उनमें कमला देवी (राप्रावि ससोला, कांडा), चंद्र प्रकाश (राप्रावि रीमा क्वीटी कपकोट) और रजनी (राप्रावि उचात बागेश्वर) के नाम शामिल हैं। इस सूची में लक्ष्मी आर्या (राप्रावि स्यालढूंगा कपकोट), रोहित कुमार (राप्रावि चनीस चनूसी कपकोट), नेहा (राप्रावि नरगोली कांडा) और संजय कुमार (राप्रावि ठेली कपकोट) के नाम भी प्रमुखता से दर्ज हैं। इसके अलावा कार्रवाई की जद में आने वाले अन्य शिक्षकों में अरविंद कुमार (राप्रावि जलमानी कपकोट), पंकज कुमार (राप्रावि सुदिल बागेश्वर) और प्रियंका (राप्रावि उडियारी जगथाना कपकोट) शामिल हैं।
इन सभी शिक्षकों के दस्तावेज जब रामनगर बोर्ड की तकनीकी जांच के दायरे में आए, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ। जांच रिपोर्ट में दस्तावेज फर्जी मिलने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया।
इस घटना के बाद अब शिक्षा विभाग के भीतर भी आंतरिक सतर्कता बढ़ाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। भविष्य में ऐसी फर्जी नियुक्तियों पर लगाम कसने के लिए दस्तावेजों के भौतिक और तकनीकी सत्यापन को और अधिक सख्त बनाने की मांग जोर पकड़ रही है।

