देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम की कार्यशालाओं में स्पेयर पार्ट्स और बजट की कमी के चलते लंबे समय से ऑफरोड खड़ी बसों को जल्द सड़क पर उतारने के लिए निगम प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाया है। दून में वरिष्ठ संवाददाता के अनुसार, डिपो से लेकर मंडल स्तर के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार बढ़ाए गए हैं ताकि मरम्मत कार्य तेजी से हो सके।
निगम मुख्यालय ने वित्तीय बाधाओं को खत्म करते हुए हर डिपो को प्रतिमाह 50 हजार रुपए तक का अतिरिक्त फंड सीधे डिपो कैश से इस्तेमाल करने की छूट दी है। इससे कार्यशालाओं में बसों के लिए आवश्यक कलपुर्जे तुरंत खरीदे जा सकेंगे। परिवहन निगम के तकनीकी महाप्रबंधक भूपेश आनंद कुशवाहा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के मुताबिक, तय सीमा से अधिक खर्च के लिए अब मंडलीय प्रबंधक से मंजूरी लेनी होगी।
वित्तीय विकेंद्रीकरण के तहत दून और काठगोदाम के मंडलीय प्रबंधकों को दो-दो लाख रुपए प्रतिमाह का अतिरिक्त व्यय अधिकार दिया गया है। वहीं टनकपुर मंडल को एक लाख रुपए प्रतिमाह अतिरिक्त खर्च करने की छूट प्रदान की गई है। बसों की मरम्मत की प्राथमिकता तय करने के लिए डिपो स्तर पर चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में एजीएम, सहायक लेखाधिकारी, वरिष्ठ लेखाकार, सीनियर फोरमैन, कार्यशाला प्रभारी और केंद्र प्रभारी शामिल रहेंगे।
निगम प्रबंधन ने सख्त हिदायत दी है कि वर्कशॉप में कोई भी बस बेवजह खड़ी नहीं रहनी चाहिए। यदि मार्ग पर किसी बस की सीट फटी या शीशा टूटा पाया गया, तो इसके लिए सीधे तौर पर सीनियर फोरमैन जिम्मेदार होंगे। प्रशासन के इस त्वरित और सख्त कदम के बाद अब उम्मीद है कि कार्यशालाओं की धूल फांक रही रोडवेज बसें जल्द सड़कों पर दौड़ेंगी। इससे आम यात्रियों को भी सुगम और बेहतर परिवहन सेवाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा।

