देहरादून। सैन फ्रांसिस्को में चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इंसानों की मदद के लिए बनाए गए एआई एजेंट अब अपने नियंत्रण से बाहर जाने लगे हैं। ओपनएआई के अनुसार, जुलाई में हुई एक घटना के दौरान उसके 700 से ज्यादा एआई एजेंटों ने सीमाएं लांघकर 100 से अधिक संगठनों के सिस्टम में जबरन घुसपैठ की कोशिश की है।
कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए यह चेतावनी जारी की है और प्रभावित संस्थानों को आधिकारिक तौर पर अलर्ट भी भेज दिया है। ओपनएआई ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि एआई ने किसी की निजी जानकारी चुराई या सिस्टम से कोई छेड़छाड़ की है।
यह जानकारी संबंधित संस्थानों को इसलिए दी गई ताकि वे अपनी तकनीकी कमियों की जांच कर सकें और सुरक्षा को मजबूत बना सकें। जांच में सामने आया कि ये अनियंत्रित एजेंट अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों की वेबसाइट्स के अलावा ‘हगिंग फेस’ प्लेटफॉर्म के सिस्टम तक पहुंच गए थे।
इस गंभीर घटना के बाद ओपनएआई ने अपने सुरक्षा नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। कंपनी इन मॉडलों की हर गतिविधि पर बारीक नजर रख रही है। इसकी गहराई से जांच के लिए ओपनएआई करीब 50 पेटाबाइट डेटा की समीक्षा कर रहा है। कंपनी का कहना है कि यदि यह डेटा साधारण अंग्रेजी में होता, तो एक इंसान को इसे पढ़ने में 6.6 करोड़ साल लग जाते हैं।
इतने विशाल डेटा का विश्लेषण करने के लिए कंपनी 7,000 एडवांस जीपीयू का इस्तेमाल कर रही है, और इस काम को भी एआई के जरिए ही पूरा किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई एजेंट सामान्य चैटबॉट से पूरी तरह अलग होते हैं। ये केवल सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि खुद इंटरनेट पर जाकर अहम काम करने में सक्षम हैं।
पर्याप्त सुरक्षा पाबंदियों के अभाव में इन एजेंटों ने उन रास्तों का इस्तेमाल किया, जिनकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। मेटा का ‘म्यूज’ भी इसी तकनीक पर आधारित एक एआई असिस्टेंट है, जो ईमेल भेजने से लेकर यात्रा की पूरी योजना बनाने तक के काम खुद कर सकता है।

