देहरादून। राजधानी देहरादून में निजी आयुष कॉलेजों में कथित अवैध दाखिलों और फर्जी प्रवेश का मामला एक बार फिर से पूरी तरह गरमा गया है। इस बार यह गंभीर सवाल बाहर से किसी ने नहीं उठाए हैं, बल्कि खुद आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल की ओर से शासन के सामने उठाए गए हैं। कुलसचिव द्वारा उठाए गए इन तीखे सवालों और शासन को भेजी गई गोपनीय चिट्ठी के वायरल होने से राज्य के चिकित्सा शिक्षा और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
आयुर्वेद विवि के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को एक गोपनीय चिट्ठी भेजी है, जिसमें वर्ष 2018-19 से लेकर वर्ष 2023-24 और वर्ष 2024 में निजी आयुष कॉलेजों में बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस पाठ्यक्रमों में नियमों के विरुद्ध प्रवेश के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुलसचिव ने अपने इस पत्र के साथ 100 से अधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी साक्ष्य के तौर पर शासन को भेजे हैं। इसके साथ ही उन्होंने खुद को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने की भी मांग की है, जिससे यह पूरा प्रशासनिक मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
खास बात यह है कि करीब एक महीने पहले शासन को भेजी गई यह गोपनीय चिट्ठी सोमवार को अचानक सोशल मीडिया पर पूरी तरह वायरल हो गई। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद से ही राज्यभर में निजी आयुष कॉलेजों की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुलसचिव ने मीडिया से बातचीत में खुद भी पुष्टि की है कि यह चिट्ठी शासन को गोपनीय रूप से भेजी गई थी, लेकिन एक माह बाद इसे किस स्तर से सार्वजनिक किया गया, इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
इस वायरल पत्र में कुलसचिव ने आरोप लगाया है कि कई छात्रों को नीट परीक्षा, काउंसलिंग और आवश्यक योग्यता पूरी किए बिना ही नियमों को ताक पर रखकर सीधे प्रवेश दे दिया गया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि निजी संस्थाओं और उनके संरक्षकों द्वारा नीट में सफल नहीं होने वाले अयोग्य छात्रों को कथित तौर पर ‘बैकडोर एंट्री’ दिलाई गई है। कई कॉलेजों में बैकडेट में नामांकन और परीक्षा रोल नंबर जारी करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे पूरी प्रवेश प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।
कुलसचिव ने अपनी इस चिट्ठी में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पत्र में यह चौंकाने वाला जिक्र किया गया है कि एक आयुष कॉलेज में परीक्षा के बाद ढाबे में बैठकर उत्तर पुस्तिकाएं भरवाई गईं। शिकायत मिलने के बाद परीक्षा केंद्र बदले जाने की बात भी सामने आई है।
मूल्यांकन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने या खराब रहने और उचित निगरानी के बिना ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निजी आयुष कॉलेजों में कथित अवैध दाखिलों को लेकर विजिलेंस जांच पहले से ही चल रही है। ऐसे में कुलसचिव की ओर से शासन को भेजी गई इस गोपनीय चिट्ठी के सार्वजनिक होने से मामला और अधिक तूल पकड़ गया है।

