देहरादून। उत्तराखंड में भी यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने के उद्देश्य से एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने की। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना हेलमेट और इंश्योरेंस के बाइक चला रहे लोगों को किसी भी सूरत में पेट्रोल न दिया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव परिवहन रविनाथ रमन और निदेशक यातायात कृष्ण कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समिति अध्यक्ष ने सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों में बिना हेलमेट, डीएल या इंश्योरेंस वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने को कहा है। नियमों का पालन न करने वाले सरकारी कर्मचारियों की अनुपस्थिति लगाने के भी सख्त आदेश दिए गए हैं। इसके लिए पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर एक विस्तृत गाइडलाइन तैयार करेंगे।
सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सभी परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। वाहन नंबर के आधार पर प्रदूषण सर्टिफिकेट और बीमा न होने पर ऑटोमेटिक चालान काटे जाएंगे। चारधाम यात्रा मार्ग पर सुरक्षा प्रबंधों को पुख्ता करने के लिए एएनपीआर कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं और पर्वतीय मार्गों पर ओवर स्पीड की निगरानी के तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है।
सड़क पर गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के लिए अब संबंधित विभागों की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही, आवारा पशुओं की वजह से होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक व्यापक नीति बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं। बैठक में इस साल अगस्त तक के आंकड़े साझा किए गए जो बेहद डराने वाले हैं।
पिछले आठ महीनों में राज्य में 1,480 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 884 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,626 लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा 229 मौतें ऊधमसिंह नगर और 213 मौतें हरिद्वार में दर्ज की गईं। दुर्घटनाओं में घायलों के इलाज के लिए पीएम राहत योजना का लाभ न मिलने पर समिति ने गहरी नाराजगी जताई है और इसमें तुरंत सुधार के निर्देश दिए हैं।

