चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित उच्च हिमालयी वसुंधरा झील पर आपदा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ टीम अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने में जुटी हुई है। देहरादून में आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की इस टीम ने झील के पास ही अपना कैंप बनाया हुआ है। माइनस 5 से माइनस 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचे भीषण ठंडे तापमान और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यह कार्य लगातार जारी है, जिससे भविष्य में संभावित आपदाओं की अग्रिम जानकारी मिल सकेगी।
हड्डियां गला देने वाली ठंड के बीच काम कर रही इस टीम को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित अत्याधुनिक उपकरण प्रदान किए गए हैं। इस महत्वपूर्ण मिशन में सीबीआरआई के वैज्ञानिकों के साथ-साथ वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान संयुक्त रूप से शामिल हैं।
अर्ली वार्निंग सिस्टम सक्रिय होने के बाद वसुंधरा झील के जलस्तर, स्थानीय तापमान, हवा की आर्द्रता, वर्षा की मात्रा और हवा की रफ्तार पर 24 घंटे रियल-टाइम नजर रखी जाएगी। इसके अलावा, यह सिस्टम झील क्षेत्र में जमने वाली बर्फ की गहराई और पानी के बहाव में होने वाले किसी भी अचानक बदलाव का सटीक डेटा भी उपलब्ध कराएगा।
झील और आसपास के हिमनदों में होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी समय रहते मिलने से निचले इलाकों में बसे गांवों को तुरंत अलर्ट किया जा सकेगा। आपदा प्रबंधन विभाग और विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों की यह संयुक्त पहल चमोली तथा अलकनंदा घाटी को झील टूटने जैसी खतरनाक आपदाओं से सुरक्षित रखने में बेहद कारगर साबित होगी।

