देहरादून। उत्तराखंड में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को बिना किसी स्पष्ट कारण के नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया है। नोटिस की वजह से स्थानीय मतदाताओं और बीएलओ के बीच भारी असमंजस की स्थिति बन गई है।
इस मामले पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पूर्व विधायक मनोज रावत के मुताबिक केदारनाथ के एक बूथ पर भेजे गए 121 नोटिसों में से 87 बिना किसी कारण के जारी किए गए थे, जिसकी औपचारिक शिकायत चुनाव आयोग में दर्ज कराई गई है।
विवाद बढ़ता देख राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि यह नोटिस सिस्टम द्वारा स्वतः जारी हुए हैं, इसलिए मतदाताओं को किसी भी तरह से घबराने या भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है।
निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाता आयोग द्वारा तय 11 मान्य दस्तावेजों में से कोई भी एक प्रमाण पत्र अपने संबंधित बीएलओ के पास जमा करा सकते हैं। इन मान्य दस्तावेजों में आधार कार्ड, पासपोर्ट और निवास प्रमाण पत्र मुख्य रूप से शामिल हैं।
आयोग के अनुसार, बीएलओ के पास इनमें से कोई भी एक दस्तावेज जमा होते ही मतदाता के नाम का सत्यापन पूर्ण मान लिया जाएगा। इसके बाद सत्यापन प्रक्रिया स्वतः पूरी हो जाएगी और मतदाताओं को बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

