देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में भारत सरकार की दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से संबंधित परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राज्य में दलहन उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता व गुणवत्ता में सुधार लाने और किसानों को एमएसपी का लाभ देकर बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। इस महत्वाकांक्षी कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के हजारों किसानों की आय बढ़ाने और स्वास्थ्य मानकों में सुधार का लक्ष्य तय किया गया है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रदेश में उत्पादित होने वाली दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नैफेड एवं एनसीडीसी के माध्यम से खरीद सुनिश्चित की जाए। इसके लिए तुरंत एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को अनुमोदन हेतु भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम से स्थानीय किसानों को अपनी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य सीधे मिल सकेगा।
किसानों के सशक्तिकरण और संगठित समूहों को बढ़ावा देने के लिए मुख्य सचिव ने एक विशेष ‘किसान उत्पादक संगठन सेल’ गठित करने का प्रस्ताव बनाने को कहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि संगठित किसान समूहों के जरिए दलहन उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और वैल्यू एडिशन को अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे कृषि क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर नए अवसर पैदा होंगे।
उत्पादकता में बढ़ोतरी का लक्ष्य तय करते हुए मुख्य सचिव ने दलहन की पैदावार को बढ़ाकर 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक ले जाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, व्यापक फसल प्रदर्शन और किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार से राज्य में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार होगा और सक्षम मानव संसाधन तैयार होगा।
बैठक में कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की यह महत्वपूर्ण दलहन परियोजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित की जाएगी। इस छह वर्षीय परियोजना के लिए राज्य स्तर की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर पहले ही केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। इसके तहत उत्तराखंड के लिए उड़द, अरहर और मसूर को मुख्य फसलों के रूप में चुना गया है।
परियोजना के क्रियान्वयन के तहत प्रदेश भर में उन्नत बीज उत्पादन से लेकर फसल प्रदर्शन पर आधारित विभिन्न विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रामाणिक बीजों और आधुनिक तकनीकों से सीधा जोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर दलहन प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने पर भी बल दिया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन हो और किसानों की आजीविका में सुधार आए।
समीक्षा बैठक में राज्य के कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं कृषि विशेषज्ञ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। बैठक में अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट, कृषि एवं उद्यान महानिदेशक आनंद श्रीवास्तव, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत जी तथा पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप सहित संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

