देहरादून। देहरादून के सबसे बड़े राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की समय पाबंदी को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। गुरुवार को हाफ-डे ओपीडी होने के बावजूद कई डॉक्टर तय समय से पहले ही अपने केबिन छोड़कर निकल गए, जिससे इलाज कराने पहुंचे मरीजों को भारी दिक्कतों से जूझना पड़ा। अस्पताल निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना द्वारा पूर्व में की गई सख्ती और निरीक्षणों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
गुरुवार को राजकीय छुट्टी के कारण अस्पताल में केवल आधे दिन की ओपीडी चलाई गई थी। इस दौरान करीब 1500 मरीज परामर्श और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। नियमों के तहत डॉक्टरों को दोपहर 1 बजे तक ओपीडी में बैठना अनिवार्य था, लेकिन कई डॉक्टर समय सीमा पूरी होने से पहले ही गायब हो गए।
दोपहर करीब सवा 12 बजे अस्पताल के विभिन्न विभागों में अव्यवस्था का माहौल देखा गया। सर्जरी विभाग में मरीजों का भारी हुजूम था, तो गायनी विभाग के बाहर महिलाओं की लंबी कतार लगी हुई थी। स्किन विभाग के बाहर 20 मरीज लाइन में खड़े थे और वहां केबिन में डॉक्टर उपलब्ध थे।
विभागवार स्थिति देखें तो बाल रोग और हड्डी रोग विभाग में 2-2 डॉक्टर बैठकर मरीजों की जांच कर रहे थे। इसके विपरीत टीबी चेस्ट विभाग से डॉक्टर पूरी तरह नदारद रहे, जिससे मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।
सबसे ज्यादा भीड़ मेडिसिन विभाग में दर्ज की गई, जहां 4 ओपीडी संचालित हो रही थीं। डेंटल विभाग में 2 डॉक्टर तैनात थे, जबकि नेत्र रोग विभाग में कोई फैकल्टी मौजूद नहीं थी। टीबी चेस्ट और आई विभाग में डॉक्टरों के न होने से दूर-दराज से पहुंचे मरीजों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा।
मामले पर संज्ञान लेते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि सभी डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे समय पर ओपीडी में आएं और निर्धारित समय तक मरीजों की जांच सुनिश्चित करें।
निदेशक के निर्देशों के बाद भी दून अस्पताल में डॉक्टरों का समय से पहले निकल जाना एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से तड़के आकर लाइन में लगने वाले 1500 से अधिक मरीजों को डॉक्टरों की इस कार्यशैली के कारण इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।

