“ED भाई साहब हों या कोई भाई साहब हों…आइए। मेरे 3 साल के कार्यकाल की कर लें जांच”, हरीश रावत का ED को खुला चैलेंज

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देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर बड़ा राजनीतिक दांव चला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या किसी भी नेता को इस मामले में बचाव की मुद्रा में आने की जरूरत नहीं है। रावत ने केंद्रीय एजेंसियों को खुला चैलेंज देते हुए अपने 3 साल के कार्यकाल, 42 हजार भर्तियों, आपदा पुनर्निर्माण और स्टिंग प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस बयान का सीधा असर उत्तराखंड की राजनीति और केंद्रीय जांच एजेंसियों के रुख पर पड़ रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे पूरी तरह आमंत्रण की मुद्रा में हैं। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘ईडी भाई साहब हों या कोई अन्य एजेंसी’, वे आकर उनके कार्यकाल में हुई तमाम नियुक्तियों की पड़ताल कर लें। रावत ने दावा किया कि उन्होंने 3 साल में 42,000 से ज्यादा पदों पर नौकरियां दी हैं, जबकि अन्य सरकारें और मुख्यमंत्री इस आंकड़े तक पहुंचने में हांफते नजर आए।

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राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि केदारनाथ आपदा के समय हुए पुनर्निर्माण-पुनर्वास कार्यों और सरकार गिराने-बचाने से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इन सभी मामलों की पड़ताल के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का एक संयुक्त आयोग बनाया जाए, जो उनके पूरे शासनकाल की पारदर्शिता से जांच करे।

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हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि किसी पर कोई राजनीतिक दबाव न रहे और किसी को बचाव न करना पड़े, इसलिए उन्होंने अपने सांगठनिक दायित्वों से त्यागपत्र देने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी पद के, केवल उत्तराखंड के एक आम नागरिक के रूप में इस स्थिति का डटकर सामना करना चाहते हैं।

संविधान और पद की मर्यादा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि संविधान में कोई प्रावधान होता, तो वे अपने पूर्व पदों के टाइटल को भी छोड़ देते। हालांकि उन्होंने माना कि यह व्यावहारिक नहीं है, लेकिन वे खुद को एक सामान्य नागरिक मानकर ही हर जांच का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत हुई भर्तियों की भी जांच कराने की चुनौती दी।

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बयान के अंत में हरीश रावत ने पत्रकारों और अपने समर्थकों से अपील की कि उनके मामले में रक्षात्मक होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त आयोग बनाने की जो मांग उन्होंने उठाई है, उसे सभी को और प्रमुखता से उठाना चाहिए।