नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल के माध्यम से पोस्ट साझा करते हुए किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में हुए ऐतिहासिक समझौते की जानकारी दी है। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित इस परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर उत्तराखंड सहित छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस ऐतिहासिक पहल से उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के राज्यों में जल सुरक्षा, सिंचाई और बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि वर्ष 1940 में परिकल्पित किशाऊ परियोजना लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित रही थी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति देने के संकल्प के क्रम में यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गई है।

सीएम धामी ने जानकारी दी कि 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाली यह बहुउद्देशीय परियोजना न केवल ऊर्जा संकट को दूर करेगी, बल्कि जल सुरक्षा, व्यापक सिंचाई व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और पौराणिक यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण की दिशा में भी ऐतिहासिक और अभूतपूर्व योगदान प्रदान करेगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों के हित में इस समझौते को आगे बढ़ाया।

उत्तराखंड के दृष्टिकोण से यह परियोजना इसलिए भी खास है क्योंकि किशाऊ बांध के निर्माण से राज्य में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास होगा। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर बनने वाले इस जल संसाधन से उत्पन्न होने वाली 422 मेगावाट हरित बिजली से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बहुउद्देशीय परियोजना को हरी झंडी मिलने और अंतर्राज्यीय सहमति बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का समस्त उत्तराखंडवासियों की ओर से हार्दिक आभार भी व्यक्त किया।
प्रशासकीय और तकनीकी बाधाएं दूर होने के बाद अब किशाऊ बांध के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस समझौते के बाद न केवल पर्वतीय राज्य उत्तराखंड को बिजली और जल प्रबंधन में लाभ होगा, बल्कि मैदानी राज्यों को भी पीने का पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

