देहरादून। देहरादून में वैश्विक निवेशक सम्मेलन के बाद लागू की गई नई औद्योगिक नीतियों का असर दिखने लगा है। उत्तराखंड में अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश जमीन पर उतर चुका है, जिससे 81 हजार से ज्यादा युवाओं को सीधे रोजगार के अवसर मिले हैं। उद्योग सचिव विनय शंकर पांडे के मुताबिक, बीते पांच सालों में बनी उद्योग-अनुकूल नीतियों से राज्य में निवेश और नौकरियों को नई रफ्तार मिली है।
पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब नए औद्योगिक क्लस्टर तैयार कर रही है। पहले चरण में अल्मोड़ा, पौड़ी और रुद्रप्रयाग जिले की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से उद्योग लगाए जाएंगे। इसमें पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और वेलनेस क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि पहाड़ी इलाकों से पलायन रुक सके।
उल्लेखनीय है कि 2023 के वैश्विक निवेशक सम्मेलन में सरकार ने विभिन्न विभागों के जरिए ₹3.57 लाख करोड़ के 1779 एमओयू साइन किए थे। इनमें से ₹1 लाख करोड़ का निवेश अब धरातल पर आ चुका है। बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए ‘उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड’ काम कर रहा है।
UIIDB के जरिए राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश लाया जा रहा है। सरकार का आकलन है कि इस बड़े निवेश का फायदा केवल सीधी नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट, होटल और स्थानीय दुकानों के जरिए लगभग 2.5 लाख अतिरिक्त अप्रत्यक्ष रोजगार और स्वरोजगार के मौके भी बनेंगे।
उद्योग सचिव विनय शंकर पांडे ने बताया कि यूआईआईडीबी के माध्यम से नए औद्योगिक क्षेत्रों का चयन लगातार जारी है। राज्य में अनुकूल माहौल मिलने से बड़े निवेशक उत्तराखंड की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नौकरियों के कई और नए रास्ते खुलेंगे।

