उत्तराखंड में PG डॉक्टरों के लिए 2 साल की सरकारी सेवा अनिवार्य, मेडिकल कॉलेजों में लागू होगी बॉन्ड नीति

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले डॉक्टरों को अब दो साल तक अनिवार्य रूप से राज्य के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देनी होंगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में बताया कि प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए सरकार पीजी दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इस फैसले का सीधा असर राज्य में पीजी की पढ़ाई करने वाले सभी MBBS डॉक्टरों पर पड़ेगा।

वर्तमान में उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी किल्लत बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञों के करीब 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। डॉक्टरों की इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने पीजी की सभी सीटों को अनिवार्य बॉन्ड व्यवस्था से भरने का फैसला किया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है

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नए नियमों के तहत मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले डॉक्टरों से दो साल की सेवा का बॉन्ड भरवाया जाएगा। इस व्यवस्था में राज्य कोटे के साथ-साथ ऑल इंडिया कोटे से आने वाले डॉक्टर भी शामिल होंगे। पीजी की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद इन डॉक्टरों को दो साल तक राज्य के सरकारी अस्पतालों में तैनात रहना अनिवार्य होगा।

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सरकार ने बॉन्ड के तहत पढ़ाई करने वाले इन मेडिकल छात्रों को फीस में भारी छूट देने का निर्णय लिया है। बॉन्ड व्यवस्था स्वीकार करने वाले डॉक्टरों से सालाना फीस के रूप में महज 60 हजार रुपये लिए जाएंगे। इस फैसले से छात्रों को बेहद कम खर्च में विशेषज्ञ डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा और राज्य को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी

फिलहाल उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 260 सीटें हैं। इन सभी सीटों पर यह नई बॉन्ड नीति लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि हर साल 260 नए विशेषज्ञ डॉक्टर मिलने से दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों के अस्पतालों में खाली पड़े पदों को तेजी से भरा जा सकेगा

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चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। पीजी प्रवेश नियमों में किया जा रहा यह बदलाव प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने में मील का पत्थर साबित होगा और आम जनता को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा।