देहरादून। देहरादून के शीशमबाड़ा और सहस्त्रधारा रोड डंपिंग साइट पर ₹40 करोड़ के लिगेसी वेस्ट निस्तारण के दावों की सच्चाई अब आईआईटी रुड़की की टीम सामने लाएगी। नगर निगम देहरादून ने कागजों में दर्ज आंकड़ों और धरातल पर कूड़े की वास्तविक स्थिति में भारी अंतर मिलने के बाद डंपिंग साइट्स का साइंटिफिक ग्राउंड सर्वे कराने का फैसला किया है। आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्यदायी कंपनियों के भुगतान और आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला होगा, जिसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ेगा।
दोनों ही साइटों पर कुल 8.40 लाख मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, कंपनियों के दावों और थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग एजेंसियों की रिपोर्ट में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। शीशमबाड़ा साइट पर कार्यरत एनवायरमेंटल टेक्नो कंपनी 3.47 लाख मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारित करने का दावा कर रही है, जबकि स्मार्ट सिटी पीआईयू सेल के सरकारी आंकड़ों में यह मात्रा केवल 2.85 लाख मीट्रिक टन दर्ज है।
इसी तरह सहस्त्रधारा रोड स्थित डंपिंग साइट पर काम कर रही सागर मोटर्स ने 2.75 लाख मीट्रिक टन कूड़ा प्रोसेस करने का दावा किया है। लेकिन मॉनिटरिंग एजेंसी ‘ब्रेन एबव’ की रिपोर्ट के मुताबिक मौके पर अब भी कूड़े का विशाल अंबार लगा हुआ है। कागजों पर काम पूरा दिखाया जा रहा है, जबकि धरातल पर स्थानीय निवासियों को बदबू और प्रदूषण से कोई राहत नहीं मिली है।
मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने स्वास्थ्य अनुभाग को वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि आईआईटी रुड़की की ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदार कंपनियों और मॉनिटरिंग एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी तथा रुका हुआ भुगतान जारी किया जाएगा।
इसके साथ ही कूड़ा निस्तारण का काम कर रही दोनों कंपनियों के अनुबंध की समय सीमा भी अंतिम चरण में है। सहस्त्रधारा साइट पर सागर मोटर्स के पास काम पूरा करने के लिए केवल 15 दिन बचे हैं, जबकि शीशमबाड़ा में एनवायरमेंटल टेक्नो को अक्टूबर तक का समय मिला है। आईआईटी की रिपोर्ट यह तय करेगी कि कंपनियों पर कार्रवाई होगी या उन्हें राहत मिलेगी।

