देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने 1320 मेगावाट थर्मल पावर करार पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा पर तीखा पलटवार किया है। भट्ट ने आंकड़ों के साथ कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि ऊर्जा क्षेत्र पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल के महंगे बिजली समझौतों का जवाब देना चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने खुलासा किया कि 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए गैस पावर करार के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य को 31.71 रुपये प्रति यूनिट की दर से अत्यधिक महंगी बिजली खरीदनी पड़ी। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली का 25 वर्षों के लिए करार केवल 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से किया है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कौन सी सरकार जनहित में काम कर रही है।
अडानी समूह से जुड़े आरोपों पर चुटकी लेते हुए महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के दोहरे रवैये को बेनकाब किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस उत्तराखंड में इस पावर प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है, वहीं तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में उसी अडानी ग्रुप के साथ बड़े-बड़े पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर एग्रीमेंट किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस अपने इस दोहरा चरित्र पर स्थिति साफ करे।
पर्यावरण और भूमि अधिग्रहण की चिंताओं को खारिज करते हुए भट्ट ने साफ किया कि 1320 मेगावाट की यह थर्मल पावर परियोजना उत्तराखंड की सीमा में स्थापित नहीं की जा रही है। इसके चलते राज्य को न तो अपनी जमीन देनी पड़ेगी और न ही यहां के पर्यावरण पर कोई प्रदूषण भार आएगा। इस करार का मुख्य मकसद उत्तराखंड की भविष्य की बिजली मांग को बिना किसी पर्यावरणीय नुकसान के पूरा करना है।
राज्य में बिजली आपूर्ति के संतुलन पर बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड में जल विद्युत और सौर ऊर्जा का उत्पादन पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहता है। ऐसे में मानसून या आपदा के समय थर्मल पावर एक मजबूत बेस-लोड का काम करेगी। सरकार हाइड्रो, सोलर, स्मॉल हाइड्रो और थर्मल पावर के एक संतुलित कॉम्बिनेशन पर काम कर रही है ताकि प्रदेश में बिजली कटौती की नौबत न आए।
भट्ट ने कहा कि लखवाड़, किसाऊ, त्यूणी-प्लासू जैसी लंबे समय से रुकी जल विद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और राजस्व दोनों पैदा हो सकें। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह केवल राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय अपने समय के महंगे करारों का हिसाब जनता को दे।

