उत्तराखंड में नक्शा पास कराने के नियम बदले, आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल निर्माण पर पूरी तरह लगा बैन

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के शहरों में अब आवासीय क्षेत्रों के भीतर कमर्शियल भवनों का निर्माण पूरी तरह से बंद होगा। केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए राज्य के आवास विभाग ने ‘यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन 2025’ की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस नए नियम के लागू होने से आवासीय जमीनों पर व्यावसायिक नक्शे पास कराने की पुरानी व्यवस्था पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।

आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के बाद पूरे प्रदेश में निर्माण कार्यों को लेकर गाइडलाइंस पूरी तरह साफ हो गई हैं। अब राज्य भर में केवल पूर्व निर्धारित मास्टर प्लान और जोनल प्लान में तय लैंडयूज़ के हिसाब से ही नक्शे पास किए जाएंगे। मनमाने ढंग से या लैंडयूज़ बदलकर किए जाने वाले निर्माणों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

यह भी पढ़ें -  वनाग्नि से बदल रही उत्तराखंड के जंगलों की संरचना, 5 साल में सिकुड़े बांज के जंगल; शोध में बड़ा खुलासा

पुरानी व्यवस्था में आवासीय लैंडयूज़ वाली जमीन पर यदि सड़क 40 फुट या उससे अधिक चौड़ी होती थी, तो कमर्शियल निर्माण की अनुमति मिल जाती थी। हालांकि, नई अधिसूचना के बाद अब यह राहत खत्म कर दी गई है। अब सड़क चाहे कितनी भी चौड़ी हो, आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण का नक्शा पास नहीं होगा

नए नियमों के मुताबिक, होटल, अस्पताल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसे निर्माण केवल उन्हीं जमीनों पर हो सकेंगे जो मास्टर प्लान में पहले से ‘कमर्शियल लैंडयूज़’ के रूप में दर्ज हैं। इसके लिए भी सड़क की चौड़ाई 40 फुट या उससे अधिक होना अनिवार्य रहेगा

यह भी पढ़ें -  'कैसा हो मेरे सपनों का उत्तराखंड?' 18 सितंबर को 140 छात्रों से संवाद करेंगे CM धामी, IAS अफसर भी सुनेंगे विजन

मास्टर प्लान के तहत यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन 2025 में कुल 152 गतिविधियों को तय कर नोटिफाइड किया गया है। इसमें जोन आधारित प्रतिबंधित श्रेणियां तय की गई हैं, जिनमें आवासीय योजना, कृषि, पार्क, आंगनबाड़ी, आश्रम, बैंक्वेट हॉल, बस स्टैंड, ईंट भट्ठा और कॉलेज जैसी 152 गतिविधियां शामिल हैं

प्रशासन ने मंजूरी की प्रक्रिया को भी बेहद सख्त बना दिया है। अब निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की विशेष छूट या मंजूरी के लिए सीधे शासन स्तर से अनुमति लेनी होगी। विकास प्राधिकरणों के अधिकार सीमित कर दिए गए हैं और नगर नियोजन की संस्तुति के बाद ही शासन स्तर से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यह भी पढ़ें -  'PM के जन्मदिन पर जनता को दिया यह तोहफा': UPI अतिरिक्त चार्ज पर गोदियाल का तीखा तंज

आवास सचिव आर राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन 2025 का मुख्य उद्देश्य शहरों में निर्माण कार्यों को सुव्यवस्थित करना और अवैध निर्माणों पर सख्ती से रोक लगाना है। राज्य में अनियंत्रित शहरीकरण को रोकने के लिए इस पूरी व्यवस्था को कड़ाई से लागू किया जाएगा