देहरादून। भारतीय सेना में तैनात अग्निवीरों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उनके लिए पक्की और स्थायी नौकरी का पूरा इंतजाम कर लिया जाएगा। इस फैसले से देश की तीनों सेनाओं में सेवा दे रहे और भविष्य में शामिल होने वाले हजारों युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
जनवरी 2027 में सेना से अग्निवीरों का पहला बैच सेवामुक्त होने जा रहा है, जिसमें 19 हजार से अधिक जवान शामिल हैं। इन्हें 1 जनवरी 2023 को सेना में भर्ती किया गया था। चार साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही रक्षा मंत्रालय ने इनके पुनर्वास के लिए एक प्रभावी ‘एग्जिट प्लान’ तैयार कर लिया है।
अग्निपथ योजना के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना के नियमित कैडर में ही रिटेन किया जाएगा। इसके लिए कार्यकाल पूरा होने से पहले ही आंतरिक परीक्षा और मेरिट सूची के आधार पर चयन कर लिया जाएगा। पुरानी योजना के विपरीत, अब किसी को भी बाहर करके दोबारा बहाल करने के बजाय कार्यकाल के दौरान ही सेना में रोकने की प्रक्रिया पूरी होगी।
वहीं, सेवामुक्त होने वाले शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों और पुलिस में स्थायी नौकरी दी जाएगी। इसके लिए गृह मंत्रालय एक विशेष पोर्टल के माध्यम से सीधी नियुक्ति प्रक्रिया संचालित करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि जब अग्निवीर सेवामुक्त हों, तो उनके हाथ में दूसरी स्थायी नौकरी का नियुक्ति पत्र मौजूद हो।
पुनर्वास योजना के तहत सशस्त्र बलों और अन्य सरकारी विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए कोटा तय कर दिया गया है। अग्निवीरों को बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स में 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इसके अलावा, इन्हें लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा से भी पूरी छूट दी जाएगी।
भारतीय रेलवे में भी अग्निवीरों के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। रेलवे में श्रेणी-1 के पदों पर 10 प्रतिशत और श्रेणी-2 व उससे ऊपर के पदों पर 5 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित किया गया है।
वर्तमान में तीनों सेनाओं में हर साल 50,000 अग्निवीर भर्ती हो रहे हैं, जिनमें अकेले थलसेना में 40,000 भर्तियां हो रही हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के इस संयुक्त एग्जिट प्लान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चार साल की सेवा के बाद देश की रक्षा करने वाले जवानों को नए सिरे से नौकरी के लिए भटकना न पड़े।

