नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों पर सख्त रुख अपनाया है। अल्मोड़ा निवासी जीवन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को 26 अक्टूबर तक जवाब पेश करने का कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि शैक्षणिक सत्र के बीच में शिक्षकों के इस फेरबदल से पैदा हुई समस्याओं का समाधान किस तरह निकाला जाएगा।
याचिकाकर्ता जीवन सिंह ने कोर्ट के समक्ष मुद्दा उठाया कि सत्र के मध्य में शिक्षकों के तबादलों से दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ाई बुरी तरह ठप हो रही है। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, प्रवक्ता संवर्ग के 189 शिक्षकों को दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में भेजा गया, जबकि महज 4 शिक्षकों को सुगम से दुर्गम में भेजा गया। इसी तरह कुमाऊं मंडल में एलटी संवर्ग के 133 शिक्षक दुर्गम से सुगम में आए और केवल 3 दुर्गम भेजे गए। प्राथमिक शिक्षा में भी 171 शिक्षक सुगम आए और सिर्फ 52 दुर्गम क्षेत्रों में भेजे गए।
सुगम और दुर्गम के बीच इस भारी असंतुलन से दुर्गम इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों का अकाल पड़ गया है। सुनवाई के दौरान अदालत में सुझाव दिया गया कि इस कमी को अतिथि शिक्षकों की तैनाती से दूर किया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने साफ किया कि बड़े पैमाने पर हुए इस बदलाव से व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है।

