देहरादून। उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों के लिए समान वेतन पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि कई विभाग पद स्वीकृत न होने का हवाला देकर इन कर्मचारियों से किनारा कर रहे हैं। समान वेतन के दायरे में आए 2300 से अधिक उपनल कर्मचारियों के समायोजन के लिए नए पदों की सख्त जरूरत है, जबकि कई स्थानों पर उपनल कर्मियों को ऐसे कैडर में तैनात कर दिया गया था जिन्हें विभाग पहले ही मृत घोषित कर चुके हैं।
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिन विभागों में स्वीकृत पद नहीं हैं, वे नए पद सृजित कर उपनल कर्मचारियों को विभागीय संविदा पर समायोजित करें। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। उपनल कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोडियल का कहना है कि 10 वर्ष की अर्हता पूरी करने के बावजूद कई विभागों में कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन नहीं मिल रहा है।
सिडकुल में तैनात 75 उपनल कर्मचारी 10 साल से अधिक समय से कार्यरत हैं, लेकिन उनका विभागीय अनुबंध नहीं किया जा रहा है और पुलिस विभाग में भी 250 से अधिक उपनल कर्मचारी इस लाभ से वंचित हैं। इतना ही नहीं, कई विभागों में तो पद न होने का हवाला देकर उपनल कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है। रुड़की स्थित राजकीय प्रिंटिंग प्रेस से कर्मचारियों को पद न होने की बात कहकर हटा दिया गया, जिसके बाद संघ ने शासन से विभागों की इस आनाकानी पर कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है।
इस बीच, शिक्षा विभाग से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया है जहाँ एलटी शिक्षक पद पर चयनित 585 युवाओं को नियुक्ति देने के लिए विभाग के पास पद ही नहीं हैं। हालांकि स्कूलों में एलटी शिक्षकों के पद बड़े पैमाने पर रिक्त हैं, लेकिन इन युवाओं को नियुक्ति देने के लिए पद सृजित नहीं किए गए हैं। इस संबंध में गढ़वाल मंडल में 501 पद सृजित करने का प्रस्ताव मंडल स्तर से निदेशालय को भेजा गया है, जबकि हाईकोर्ट इन युवाओं को नियुक्ति देने के आदेश दे चुका है।
इन तमाम प्रशासनिक विसंगतियों और आदेशों की अवमानना को लेकर राज्य सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। हाईकोर्ट में उपनल कर्मचारी संघ की अवमानना याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई, जिस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर तय की है। संघ की ओर से पैरवी करते हुए बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है और इसके विपरीत उपनल कर्मचारियों से जबरन बांड भरवाया जा रहा है।
संघ ने याद दिलाया कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 में उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का ऐतिहासिक आदेश दिया था और वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी संविदा कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद भी न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह अनुपालन न होने के कारण उपनल कर्मचारी संघ को विवश होकर अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी है, जिस पर अब आगामी 27 अक्टूबर को अदालत में सुनवाई होगी।

