25 साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत: THDC के 1000 करोड़ के मुनाफे में उत्तराखंड को मिलेगा अधिकार

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देहरादून। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सालाना 1,000 करोड़ रुपये के बड़े मुनाफे में अब उत्तराखंड को अपना वाजिब हक मिलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट में पिछले 25 वर्षों से चली आ रही अंतरराज्यीय कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सर्वोच्च अदालत में केस कमजोर पड़ते ही उत्तर प्रदेश सरकार समझौते के लिए तैयार हो गई है, जिस पर 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।

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प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने जानकारी दी कि राज्य गठन के समय से ही उत्तराखंड सरकार टीएचडीसी के मुनाफे में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग कर रही थी। नियमानुसार, जिस राज्य में कंपनी का मुख्यालय होता है, उसे मुनाफे का 25 फीसदी हिस्सा मिलता है। टीएचडीसी का मुख्यालय पहले नोएडा में था, जिसे बाद में उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसके आधार पर राज्य ने अपने अधिकार का दावा ठोका था।

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अदालती कार्यवाही के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार लगातार तारीख की मांग करती आ रही थी। लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि यूपी को अब और मोहलत नहीं दी जाएगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में आपसी समझौते से मामले को सुलझाने का अनुरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले या इस आपसी समझौते से उत्तराखंड के खजाने को हर साल 100 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा वित्तीय लाभ होगा। यदि राज्य को पूरे 25 फीसदी हिस्सेदारी का अधिकार मिलता है तो सालाना 250 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे, जबकि 20 प्रतिशत पर 200 करोड़, 15 प्रतिशत पर 150 करोड़ और 10 प्रतिशत हिस्सेदारी तय होने पर 100 करोड़ रुपये सालाना मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2001 से अब तक का सारा बकाया भी राज्य को मिलेगा।