देहरादून। उत्तराखंड से भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही राज्य से उच्च सदन की एक सीट खाली हो जाएगी। प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार के पास विधानसभा में स्पष्ट और मजबूत बहुमत है, इसलिए यह तय माना जा रहा है कि बीजेपी का प्रत्याशी ही निर्विरोध राज्यसभा पहुंचेगा। इस बीच सीट हासिल करने के लिए बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने दिल्ली से लेकर देहरादून तक राजनीतिक घेराबंदी और लॉबिंग शुरू कर दी है।
राज्यसभा टिकट की होड़ में शामिल दावेदारों की सक्रियता प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री आवास, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दफ्तरों तक देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिवाली से ठीक पहले शीर्ष नेतृत्व किस नेता पर मेहरबान होगा और किसे राज्यसभा का टिकट देकर दिवाली का तोहफा देगा।
प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत कार्यकर्ताओं की दावेदारी ली जाएगी। इनमें से तीन प्रमुख दावेदारों के नामों का पैनल तैयार कर राष्ट्रीय संगठन को भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति जिस नाम पर अंतिम मुहर लगाएगी, प्रदेश संगठन उसी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगाएगा।
राज्यसभा सीट की रेस में इस समय कई प्रमुख नाम और राजनीतिक समीकरण आगे चल रहे हैं, जिसमें संगठन में लंबे अनुभव को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, जिन्हें पार्टी आलाकमान दिल्ली भेज सकता है।
इसके साथ ही संघ और संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले वर्तमान सांसद नरेश बंसल को दोबारा मौका मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि राजनीतिक फिज़ा में पूर्व मंत्री व वरिष्ठ नेता प्रेमचंद अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से तैर रहा है।
वहीं यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि भाजपा किसी निष्ठावान व संघ के करीबी व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधि को अवसर दे सकती है, जिसके तहत हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश या उधमसिंह नगर से जुड़े किसी प्रमुख कारोबारी नेता के नाम पर मुहर लग सकती है।
उत्तराखंड के राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि भाजपा आलाकमान इस बार क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लेगा, जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दिल्ली दरबार से किसके नाम पर मुहर लगती है और कौन सा नेता उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने राज्यसभा पहुंचेगा।

