उत्तराखंड: मदरसा बोर्ड भंग होने के 3 महीने बाद भी नहीं तैयार हुआ प्राधिकरण का ढांचा

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देहरादून। उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को बुधवार को पूरे तीन महीने का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक इस प्राधिकरण का मूल प्रशासनिक ढांचा तैयार नहीं किया जा सका है。 राजधानी देहरादून में सामने आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, ढांचा न बन पाने के कारण न तो पुराने मदरसा बोर्ड के नौ कर्मचारियों का समायोजन हो पाया है और न ही काम न होने के बावजूद इन कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से वेतन मिल सका है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं。

प्राधिकरण का ढांचा पूरी तरह तैयार न होने से इसका संपूर्ण कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर मदरसों की मान्यता और व्यवस्था पर पड़ रहा है。 स्थिति यह है कि अब तक कुल 452 मदरसों में से महज 35 को ही प्राधिकरण द्वारा मान्यता दी जा सकी है, और जिन्हें मान्यता मिल भी चुकी है, वहां अब तक नया पाठ्यक्रम यानी सिलेबस तक लागू नहीं किया जा सका है。

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प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत उप रजिस्ट्रार, इंस्पेक्टर और नौ अन्य कर्मचारियों के पद शामिल होने हैं。 प्राधिकरण के पदाधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा शासन तथा मंत्री स्तर पर इस मामले को कई बार पुरजोर तरीके से उठाया जा चुका है, लेकिन तमाम वार्ताओं और प्रयासों के बाद भी अब तक इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है。

प्रदेश में कुल 452 मदरसे रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 179 खुद बंद हो चुके हैं और 19 मदरसों को प्रशासनिक स्तर पर सील कर दिया गया है。 इसके अलावा लगभग 180 मदरसों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में अपने आवेदन किए हुए हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की सुस्ती और लेटलतीफी की वजह से ये सभी आवेदन लंबे समय से अटके पड़े हैं。

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प्राधिकरण की लचर स्थिति को स्पष्ट करते हुए अध्यक्ष डॉ. सुरजीत गांधी ने बताया है कि वे लगातार शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अफसरों से मुलाकात कर रहे हैं और इन अटके हुए आवेदनों पर जल्द से जल्द मान्यता देने का अनुरोध कर रहे हैं。 उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा और मदरसों के सुचारू संचालन के लिए इस प्रक्रिया में तेजी लाना बेहद जरूरी हो गया है。

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दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई लगातार जारी है。 उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही प्राधिकरण के नए ढांचे के गठन और कर्मचारियों के समायोजन के संबंध में शासन की ओर से औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया जाएगा。

शिक्षा विभाग को भी यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित आवेदनों की पूरी तरह जांच करें और तय मानकों के अनुसार मदरसों को जल्द से जल्द मान्यता प्रदान करें。 अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन के इन आश्वासनों के बाद कब तक धरातल पर बदलाव नजर आता है और कर्मचारियों तथा मदरसों को राहत मिलती है。