उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल का कड़ा निर्देश: दाखिले के लिए साइंस के सभी विषयों में पास होना अनिवार्य

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देहरादून। उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल की ओर से राज्य के सभी फार्मेसी संस्थानों के लिए बेहद कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत बीफार्मा और डीफार्मा कोर्स में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट साइंस के सभी विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया गया है। देहरादून से सामने आई इस खबर के अनुसार, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित या बायोलॉजी में से यदि कोई छात्र किसी एक विषय में भी फेल है, तो वह इन मेडिकल कोर्सेस में दाखिला नहीं ले पाएगा। काउंसिल के इस महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश से उन तमाम छात्रों और लापरवाह शिक्षण संस्थानों पर सीधा असर पड़ा है जो नियमों की अनदेखी कर रहे थे।

विदित हो कि फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने के लिए शैक्षणिक योग्यता के तहत भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित या बायोलॉजी यानी साइंस स्ट्रीम में इंटरमीडिएट परीक्षा पास करना जरूरी होता है। इसके अलावा बीफार्मा कोर्स के लिए साइंस स्ट्रीम के साथ अंग्रेजी विषय का होना भी अनिवार्य किया गया है। इसके बावजूद यह बात सामने आई थी कि कई कॉलेज ऐसे छात्रों को भी लगातार प्रवेश दे रहे थे जो फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायोलॉजी जैसे मुख्य विषयों में से किसी एक में फेल थे।

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इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि एक भी विषय में फेल होने वाले छात्र फार्मेसी कोर्स में दाखिला लेने के योग्य नहीं माने जाएंगे। काउंसिल के रजिस्ट्रार कलम सिंह फर्स्वाण की ओर से इस संदर्भ में आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी गई है कि ऐसे नियमों के विरुद्ध प्रवेश पाने वाले छात्रों को काउंसिल की ओर से पंजीकरण नहीं दिया जाएगा। पंजीकरण न मिलने की स्थिति में छात्रों की पूरी पढ़ाई बेकार हो जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज की होगी।

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वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के भीतर कुल 96 कॉलेज, 24 यूनिवर्सिटी और 21 पॉलीटेक्निक संस्थानों में विभिन्न फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों में दो वर्षीय डीफार्मा (डिप्लोमा), चार वर्षीय बीफार्मा (डिग्री), दो वर्षीय एम फार्मा और छह वर्षीय डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (फार्म डी) जैसे महत्वपूर्ण कोर्स शामिल हैं। काउंसिल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को कोर्स पूरा करने के बाद भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए सभी कॉलेजों को पहले ही कड़ाई से आगाह कर दिया गया है।

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काउंसिल के इन सख्त दिशा-निर्देशों के बाद अब राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को प्रवेश प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से मेडिकल और पैरामेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा अयोग्य प्रवेशों पर पूरी तरह लगाम लगेगी। प्रशासन की इस सख्ती से कॉलेज संचालकों में भी हड़कंप मच गया है और अब वे काउंसिल की गाइडलाइंस के अनुसार ही आगामी सत्र के लिए दाखिले की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।