देहरादून। शराब की ओवर रेटिंग कर लोगों की जेब काटने वाले शराब कारोबारियों की अब खैर नहीं! मदिरा दुकानों पर ओवररेटिंग की लगातार मिल रही शिकायतों को आबकारी विभाग ने गंभीरता से लिया है। आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जनपदों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि शराब की बिक्री निर्धारित मूल्य पर ही हो और ओवररेटिंग की शिकायत सामने आते ही तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दरअसल, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार विभाग तक पहुंच रही हैं। उपभोक्ता टोल फ्री नंबर समेत अलग-अलग माध्यमों से अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। शिकायतों की बढ़ती संख्या ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में अब विभाग ने सिर्फ शराब कारोबारियों पर कार्रवाई की चेतावनी नहीं दी है, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है।
आबकारी आयुक्त की ओर से जारी आदेश में साफ किया गया है कि मदिरा दुकानों की नियमित चेकिंग कराई जाए और निर्धारित मूल्य पर ही शराब की बिक्री सुनिश्चित की जाए। ओवररेटिंग की रोकथाम के लिए अधिकारियों को प्रभावी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब केवल शिकायत का इंतजार करने के बजाय विभागीय अमले को खुद मैदान में उतरकर दुकानों की जांच करनी होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि तमाम निर्देशों के बावजूद किसी मदिरा दुकान पर ओवररेटिंग का मामला सामने आता है तो कार्रवाई केवल संबंधित दुकान तक सीमित नहीं रहेगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित जिला आबकारी अधिकारी और क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि ठेके पर शराब महंगी क्यों बिकी, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि जिस क्षेत्र में दुकान संचालित हो रही थी, वहां निगरानी करने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे?
आबकारी आयुक्त के इस आदेश ने विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी को सीधे दुकानों की बिक्री व्यवस्था से जोड़ दिया है। इससे साफ संकेत है कि सरकार और आबकारी विभाग ओवररेटिंग को लेकर अब शिकायतों को हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित क्षेत्र में ओवररेटिंग की रोकथाम की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित जिला आबकारी अधिकारी और क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी की होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में मदिरा दुकानों की चेकिंग बढ़ने की उम्मीद है और शराब कारोबारियों की मनमानी पर विभागीय कार्रवाई का शिकंजा और कस सकता है।
अब तक शराब की बोतल पर कुछ रुपये ज्यादा वसूलकर निकल जाने वाले कारोबारियों के लिए विभाग का यह फरमान सीधी चेतावनी माना जा रहा है—दुकान आपकी हो सकती है, लेकिन नियम विभाग के होंगे और निगरानी भी होगी। वहीं, अधिकारियों के लिए भी संदेश साफ है कि अगर किसी दुकान पर ओवररेटिंग पकड़ी गई तो सिर्फ ठेकेदार पर कार्रवाई करके मामला खत्म नहीं होगा। जिम्मेदारी तय होने के बाद संबंधित अफसरों को भी जवाब देना होगा।
कुल मिलाकर आबकारी विभाग का यह आदेश शराब की दुकानों पर चल रही कथित मनमानी पर ब्रेक लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि आदेश के बाद मैदान में चेकिंग कितनी तेज होती है और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों पर कितनी सख्ती दिखाई देती है।

