उत्तराखंड: रेप, पॉक्सो और एनडीपीएस मामलों में हाईकोर्ट सख्त, 1 हफ्ते के भीतर सैंपल भेजना होगा अनिवार्य

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस विवेचना और फॉरेंसिक रिपोर्ट समय पर न मिलने पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने आनंद प्रकाश धवन की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जांच में देरी से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

अदालत की सख्ती के बाद डीजीपी और गृह सचिव ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर बताया कि राज्य में विवेचना में तेजी लाने के लिए 150 पुलिस अधिकारियों की ‘इन्वेस्टिगेशन सेल’ गठित कर दी गई है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के जोगिंदर कुमार और ललिता कुमारी मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है।

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हाईकोर्ट ने रेप, पॉक्सो और एनडीपीएस जैसे जघन्य अपराधों में फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी पर सबसे कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन मामलों में 90 दिन में चार्जशीट दाखिल होनी है, उनमें 75 दिनों के भीतर फॉरेंसिक रिपोर्ट दी जाए। वहीं 60 दिनों की चार्जशीट वाले मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर विवेचक को सौंपनी होगी।

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वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व को देखते हुए फॉरेंसिक लैब में वैज्ञानिकों की संख्या 11 से बढ़ाकर 28 कर दी गई है। डीजीपी ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि घटना से जुड़े सैंपल लिए जाने के एक सप्ताह के भीतर उन्हें फॉरेंसिक लैब भेजना अनिवार्य होगा।

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पुलिस की कार्यकुशलता और कानूनी समझ बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट ने डीजीपी को हर शहर में नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की सलाह दी है। इन सत्रों में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों और अनुभवी अधिवक्ताओं की सेवाएं ली जाएंगी। उच्च न्यायालय ने इन सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए अगली सुनवाई की तिथि 30 सितंबर 2026 तय की है।