स्वास्थ्य विभाग खरीदारी के लिए बनी नई व्यवस्था… कॉरपोरेशन बनते ही MD की कुर्सी के लिए लॉबिंग तेज…

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देहरादून। स्वास्थ्य विभाग में कभी अधिकारियों के लिए मलाईदार पोस्टिंग माने जाने वाले जेडी स्टोर का स्वरूप अब ना के बराबर हो गया है अब जेडी स्टोर से खरीदारी की जिम्मदारी कॉरपोरेशन बनने के बाद अब प्रबंध निदेशक की होगी जिसको को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वजह भी साफ है—स्वास्थ्य विभाग की दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण काम अब इसी कॉरपोरेशन के माध्यम से होने हैं। यानी खरीद का बड़ा जिम्मा, बजट का प्रबंधन और व्यवस्था संचालन की कमान जिस अधिकारी के हाथ में होगी, उसकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

सूत्रों की मानें तो कॉरपोरेशन के पहले एमडी की कुर्सी पर बैठने के लिए अधिकारियों के बीच जोड़-तोड़ और लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है। कुछ अधिकारी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को हासिल करने की संभावनाएं तलाश रहे है। हालांकि, नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला शासन स्तर पर होना है और फिलहाल किसी अधिकारी के नाम पर मुहर लगने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नए कॉरपोरेशन की कमान किस अधिकारी को सौंपी जाएगी और नियुक्ति में अनुभव को प्राथमिकता मिलेगी या प्रशासनिक समीकरण भारी पड़ेंगे?

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5 फीसदी कमीशन और खरीद का बड़ा कारोबार

कॉरपोरेशन की अहमियत समझने के लिए इसके कामकाज पर नजर डालना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद से संबंधित कार्य कॉरपोरेशन के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था बनाई गई है। इसके बदले विभाग की ओर से कॉरपोरेशन को पांच प्रतिशत राशि सेंटेज के रूप में दिए जाने का प्रावधान बताया जा रहा है। यही व्यवस्था इस संस्थान को आर्थिक और प्रशासनिक लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।

अब सवाल यह है कि कॉरपोरेशन बनने के बाद खरीद प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी, टेंडर और भुगतान की व्यवस्था किस तरह संचालित होगी और अस्पतालों तक दवाइयां व उपकरण समय पर पहुंचाने की जिम्मेदारी कैसे निभाई जाएगी? यदि व्यवस्था का संचालन मजबूत हुआ तो इसका सीधा लाभ सरकारी अस्पतालों और मरीजों को मिल सकता है। लेकिन यदि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हुई तो नई व्यवस्था भी पुराने सवालों से घिर सकती है।

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15 पदों का ढांचा तैयार, अब कमान संभालने वाले पर निगाहें

कॉरपोरेशन के संचालन के लिए करीब 15 पदों का ढांचा तैयार किया गया है, जिसका विधिवत आदेश जारी होने की जानकारी है। प्रस्तावित ढांचे में एमडी के अलावा महाप्रबंधक, वित्त निदेशक, प्रोक्योरमेंट ऑफिसर, प्रोक्योरमेंट एक्सपर्ट, सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर, बायोमेडिकल इंजीनियर, कंपनी सेक्रेटरी, अकाउंटेंट, टेक्निकल ऑफिसर और सहायक स्तर के पद शामिल बताए गए हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्त निदेशक के लिए पूर्व एनएचएम अधिकारी की तैनाती का प्रावधान है। प्रोक्योरमेंट ऑफिसर के दो पद प्रतिनियुक्ति से भरे जा सकते हैं, जबकि प्रोक्योरमेंट एक्सपर्ट के भी दो पद प्रस्तावित हैं। सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर का पद एफडीए से प्रतिनियुक्ति पर भरे जाने की व्यवस्था बताई गई है। इसके अतिरिक्त बायोमेडिकल इंजीनियर, कंपनी सेक्रेटरी, अकाउंटेंट और तकनीकी व सहायक कर्मचारियों के पद भी ढांचे में शामिल हैं। कुछ पदों पर संविदा नियुक्ति का प्रावधान भी बताया जा रहा है।

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नई व्यवस्था, नई उम्मीदें और जवाबदेही की परीक्षा

अब असली परीक्षा कॉरपोरेशन के गठन की नहीं, बल्कि उसके संचालन की होगी। सरकार का उद्देश्य यदि खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाना है तो नियुक्तियों से लेकर टेंडर और भुगतान तक हर स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी।

फिलहाल सबसे ज्यादा निगाहें पहले एमडी की नियुक्ति पर टिकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के प्रोक्योरमेंट स्टोर से कॉरपोरेशन तक का सफर तय करने वाली इस व्यवस्था में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पहली कमान किस अधिकारी को मिलती है। कुर्सी भले एक हो, लेकिन उसके साथ जुड़ी जिम्मेदारियां और दांव दोनों बड़े हैं।