उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा, 5 लाख सैलरी के बाद भी खाली हैं आधे पद

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का भारी संकट बना हुआ है, जिससे आम जनता महंगे दामों पर निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर है। राज्य सरकार द्वारा चार से पांच लाख रुपये का भारी-भरकम मासिक वेतन और अन्य सुविधाएं देने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग आधे पद खाली पड़े हुए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 1291 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 601 पद वर्तमान में खाली चल रहे हैं। हालत यह है कि विशेषज्ञ फिजिशियन डॉक्टरों के 182 स्वीकृत पदों में से 130 पद खाली हैं, वहीं सर्जन डॉक्टरों के 144 में से 70 पद लंबे समय से रिक्त हैं

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चिकित्सा सेवाओं के अन्य प्रमुख विभागों में एनेस्थीसिया एक्सपर्ट डॉक्टरों के 181 स्वीकृत पदों में से 94 पद खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के 160 पदों में से 85 पद और स्त्री रोग विशेषज्ञों के 175 स्वीकृत पदों में से 102 पद खाली हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों के इलाज पर संकट गहरा गया है

अन्य विशेषज्ञ विभागों का हाल भी अलग नहीं है, जहां मनोचिकित्सकों के 29 में से 20 पद खाली हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टरों के 25 में से 23 पद और चर्मरोग विशेषज्ञों के 35 में से 28 पद रिक्त पड़े हैं। माइक्रोबायोलॉजी विशेषज्ञों के 10 पद तथा पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञों के 97 में से 67 पद खाली चल रहे हैं

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डॉक्टरों के सरकारी अस्पतालों में न टिकने की मुख्य वजह निजी अस्पतालों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा है। जहां सरकारी अस्पताल में 4 से 5 लाख रुपये वेतन मिलता है, वहीं निजी अस्पताल डॉक्टरों को 8 से 12 लाख रुपये वेतन और प्रति मरीज कमीशन भी देते हैं। साथ ही सुदूर पहाड़ी इलाकों में अच्छी नागरिक सुविधाओं का अभाव भी एक बड़ी वजह है

कमी दूर करने के लिए सरकार डॉक्टरों को अतिरिक्त भत्ता दे रही है और ‘यू कोट, वी पे’ जैसी योजनाएं भी शुरू की गईं। हालांकि, उच्च वेतनमान के इस प्रस्ताव में भी बहुत कम डॉक्टरों ने रुचि दिखाई है।

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स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनिता टम्टा के अनुसार, सरकार डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाकर और पीजी डॉक्टरों से दो साल का सेवा बॉन्ड भरवाकर इस कमी को पूरा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही सभी प्रमुख विभागों में योग्य चिकित्सकों की तैनाती कर ली जाएगी

वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि सरकार को आवश्यकता के हिसाब से डॉक्टरों की तैनाती करनी चाहिए। इसके साथ ही IMA सेक्रेटरी डॉ. क्षितिज बाली ने कहा कि अस्पतालों में बेहतर उपकरण और डॉक्टरों के परिवारों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करके ही इस संकट से निपटा जा सकता है।