देहरादून। उत्तराखंड के वन प्रभागों को प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के तहत 104 करोड़ रुपये जारी किए जाने के बावजूद बजट खर्च करने की रफ्तार बेहद सुस्त है। 31 अगस्त तक जारी की गई कुल धनराशि में से राज्य के वन प्रभाग महज 21 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाए हैं। इस सुस्ती का सीधा असर राज्य में चलाए जा रहे वनीकरण, मिट्टी संरक्षण और जल संरक्षण संबंधी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष में कैंपा योजना के तहत उत्तराखंड के लिए कुल 339 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया गया था। इसमें से पहले चरण के तहत विभिन्न वन प्रभागों को 104 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी। हालांकि, समयसीमा बीत जाने के बाद भी अधिकांश वन प्रभाग आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, नरेंद्रनगर वन प्रभाग को सबसे ज्यादा 24 करोड़ 41 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। इसके बावजूद नरेंद्रनगर प्रभाग में अब तक केवल 2 करोड़ 90 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। वहीं, देहरादून वन प्रभाग को 23 करोड़ 26 लाख रुपये मिले थे, जिसमें से प्रभाग द्वारा 11 करोड़ 28 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई है।
गढ़वाल क्षेत्र के अन्य वन प्रभागों को एक करोड़ 90 लाख रुपये से लेकर करीब नौ करोड़ रुपये तक का बजट जारी किया गया है। राज्य में सबसे कम एक करोड़ 90 लाख रुपये का बजट भूमि संरक्षण अलकनंदा वन प्रभाग को मिला है। कई प्रभागों का प्रदर्शन इतना निराशाजनक रहा कि वे अपने जारी बजट का केवल 8 से 12 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग कर पाए हैं।
इस बीच वन विभाग के सामने एक और बड़ी वित्तीय चुनौती खड़ी हो गई है क्योंकि केंद्रीय मंत्रालय से 207 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि और मंजूर हो चुकी है। यह राशि भी जल्द ही वन प्रभागों को जारी की जानी है। ऐसे में पहले की राशि खर्च न हो पाने के कारण अधिकारियों के सामने अगले छह महीनों में पूरी धनराशि को पारदर्शी तरीके से खर्च करने की बड़ी चुनौती होगी।
नरेंद्रनगर वन प्रभाग को अधिक बजट मिलने पर कैंपा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीके गांगटे ने स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि नरेंद्रनगर प्रभाग को कैचमेंट प्लान के तहत विशेष कार्यों के लिए ज्यादा बजट दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य बारिश के पानी के साथ मिट्टी के कटाव को रोकना और मिट्टी को सीधे नदियों में जाने से बचाना है।
सीईओ बीके गांगटे ने धीमी प्रगति पर सफाई देते हुए कहा कि मानसून और बारिश के समय मैदानी व पहाड़ी इलाकों में काम करना काफी मुश्किल होता है। उन्होंने जानकारी दी कि बारिश रुकते ही सभी विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी और इस संबंध में अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।

