उत्तराखंड में पर्यावरण मंजूरी का रास्ता साफ: SEIAA और SEAC के लिए बनी स्टैंडिंग कमेटी, मुख्य सचिव संभालेंगे कमान

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देहरादून। उत्तराखंड में राज्य पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण और राज्य विशेष अंकन समिति के पुनर्गठन तक अब एक नई स्टैंडिंग कमेटी इनसे जुड़े सभी कामकाज को देखेगी। अक्टूबर 2025 में इनका कार्यकाल समाप्त होने के कारण विकास परियोजनाओं, सड़क निर्माण और खनन से जुड़े पर्यावरण मंजूरी के मामले लटके हुए थे। इस अंतरिम व्यवस्था से राज्य में रुके हुए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ होगा।

राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के निदेशक एसपी सुबुद्धि के अनुसार, सीया और सीयाक के नए सिरे से गठन की प्रक्रिया शुरू करते हुए आवेदन मांग लिए गए हैं। इससे पहले चल रही गठन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा संबंधित मंत्रालय ने नियमों में संशोधन करते हुए सीया और सीयाक के कार्यकाल को तीन साल से बढ़ाकर अब चार साल कर दिया है

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उल्लेखनीय है कि राज्य में 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में होने वाले खनन, बड़े उद्योगों की स्थापना और सड़क निर्माण के लिए सीया से पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कराकर अनुमति लेना अनिवार्य होता है। प्राधिकरण का कार्यकाल समाप्त होने से यह सभी बड़े प्रोजेक्ट्स अटके हुए थे, जिससे राज्य का विकास और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा था

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मंत्रालय द्वारा लागू नई व्यवस्था के तहत सीया के लिए गठित स्टैंडिंग कमेटी की कमान मुख्य सचिव को सौंपी गई है, जिसमें पीसीसीएफ सदस्य और अपर सचिव सदस्य सचिव बनाए गए हैं। वहीं सीयाक की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष प्रमुख सचिव होंगे, जिसमें पीसीबी के सदस्य सचिव सहित तीन अन्य सदस्यों को शामिल किया गया है

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यह नवगठित स्टैंडिंग कमेटी सीया और सीयाक के नियमित गठन होने तक राज्य में पर्यावरण मंजूरी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों की समीक्षा करेगी और उन पर निर्णय लेगी। इससे प्रदेश में पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ विकास कार्यों में तेजी आ सकेगी।