Uttarakhand: गोल्डन कार्ड में हट सकती है बाध्यता, CM धामी से वार्ता के बाद कैबिनेट जाएगा प्रस्ताव

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देहरादून। उत्तराखंड के राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए गोल्डन कार्ड योजना से जुड़ी राहत भरी खबर है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में हुई अहम बैठक में योजना की व्यावहारिक खामियों और अक्टूबर 2025 से रुके चिकित्सा बिलों के भुगतान पर सहमति बनी। सचिवालय संघ के बैनर तले 15 प्रमुख कर्मचारी संगठनों के साथ हुई इस वार्ता के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी लंबित मांगों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा कर प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।

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बैठक में कर्मचारी संगठनों ने योजना को पूरी तरह कैशलेस बनाने और बजट में गैप फंडिंग के बजाय सरकार से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान करने की मांग उठाई। कर्मचारी नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि राज्य की गोल्डन कार्ड व्यवस्था को केंद्र सरकार की सीजीएचएस योजना की तर्ज पर पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए।

कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग परिवार के 25 वर्ष से अधिक आयु के आश्रित सदस्यों को भी स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में लाने की थी। इस पर शासन स्तर से 25 वर्ष की बाध्यता समाप्त करने का संशोधन प्रस्ताव तैयार करने पर सहमति जता दी गई है। साथ ही, अब तक योजना से वंचित रह गए पात्र कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

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निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए कर्मचारी और शिक्षक यूनियनों ने सभी अनुबंधित और गैर-अनुबंधित अस्पतालों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की पुरजोर मांग की। इसके अलावा, गंभीर बीमारियों के बेहतर इलाज के लिए मैक्स, सिनर्जी, एम्स और दिल्ली के बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को गोल्डन कार्ड से जोड़ने की भी मांग रखी गई।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए ओपीडी के कई मदों को जल्द कैशलेस करने का भरोसा दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कर्मचारी संगठनों के साथ एक और अंतिम दौर की वार्ता कर मंगलवार तक बैठक का आधिकारिक कार्यवृत्त जारी किया जाए, ताकि जल्द कैबिनेट नोट तैयार हो सके।

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इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अरुण पांडे, राजेंद्र प्रसाद रतूड़ी, राकेश जोशी और मुकेश बहुगुणा समेत दर्जनों कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

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