Uttarakhand: आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों की वरिष्ठता 2012 से ही होगी मान्य- हाई कोर्ट..

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देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवा विभाग के फार्मासिस्टों की वरिष्ठता विवाद पर बड़ा निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण के फैसले को सही ठहराते हुए आदेश दिया कि फार्मासिस्टों की वरिष्ठता 7 नवंबर 2012 के नए नियुक्ति आदेश और उसकी मेरिट के आधार पर ही तय होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2009 की प्रारंभिक चयन प्रक्रिया और मेरिट सूची पूरी तरह निरस्त हो चुकी थी। ऐसे में 2009 के बैच को पिछली तिथि से वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता। इस फैसले से विभाग में पिछले कई सालों से चल रहे पदोन्नति विवाद पर विराम लग गया है।

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यह विवाद वर्ष 2009 में निकाली गई फार्मासिस्ट भर्ती से शुरू हुआ था, जिसमें बैक पेपर या पूरक परीक्षा पास अभ्यर्थियों को मेरिट में नीचे रखा गया था। इसके खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद 2012 में पुरानी चयन सूची निरस्त कर नए सिरे से नियुक्तियां दी गई थीं।

विभाग ने वर्ष 2019 में एक वरिष्ठता सूची जारी कर 2009 के कर्मचारियों को पुरानी तिथि से वरिष्ठता दे दी थी, जिसे लोक सेवा अधिकरण ने रद्द कर दिया था। अब हाई कोर्ट ने अधिकरण के आदेश पर अपनी मुहर लगाते हुए पुरानी वरिष्ठता का दावा करने वाली पूनम व अन्य अभ्यर्थियों की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

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एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने टिहरी बांध परियोजना के विस्थापित इंद्रमणि की कृषि भूमि से जुड़ी अपील खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने कहा कि पुनर्वास के तहत दी जाने वाली जमीन कृषि योग्य होनी चाहिए, लेकिन आवंटी को अपनी मर्जी का भूखंड चुनने का असीमित अधिकार नहीं है।

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मामला हरिद्वार के पथरीबाग-3 में आवंटित 2 एकड़ कृषि प्लॉट संख्या 330 से जुड़ा था, जिसे आवंटी ऋषिकेश में बदलने की मांग कर रहे थे। पुनर्वास निदेशक ने शपथपत्र दाखिल कर बताया कि 20 लाख रुपये खर्च कर भूमि को समतल और उपजाऊ बना दिया गया है, जिसके बाद अदालत ने भूखंड बदलने की मांग को अस्वीकार कर दिया।

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