देहरादून। उत्तराखण्ड भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय में आज निदेशक राजपाल लेघा की अध्यक्षता में एमडीटीएसएस योजना के अंतर्गत कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान खनिज वाहन स्वामियों की दैनिक सुविधाओं और ई-रवन्ना की वैधता से जुड़े विषयों पर विस्तार से मंथन किया गया।
समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि अक्सर भारी ट्रैफिक जाम, नो-एंट्री जोन, VVIP मूवमेंट या अचानक वाहन खराब हो जाने जैसी आकस्मिक परिस्थितियों के कारण ई-रवन्ना की निर्धारित वैधता अवधि समाप्त हो जाती है। वैध अवधि समाप्त होने के ऐसे मामलों में वाहन चालकों का भारी-भरकम ई-चालान कट जाता है, जिससे उन्हें बेवजह आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
खनिज वाहन स्वामियों की इस गंभीर समस्या का त्वरित समाधान निकालने के लिए निदेशालय द्वारा एक नई हेल्पलाइन नंबर व्यवस्था का शुभारंभ किया गया है। वाहन स्वामी अब किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में सहायता के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों 8192802345 और 8192802320 पर संपर्क कर सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत, यदि रास्ते में किसी भी वाजिब कारण से ई-रवन्ना की समय सीमा समाप्त होती है, तो वाहन चालक अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट की साफ फोटो और अपने वाहन के जीपीएस कोऑर्डिनेट्स यानी लोकेशन को व्हाट्सऐप के माध्यम से इन नंबरों पर भेज सकते हैं। लोकेशन और फोटो भेजकर वाहन स्वामी तत्काल प्रभाव से अपनी सूचना दर्ज करा सकते हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक कार्रवाई से सुरक्षा मिलेगी।
भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय की इस खास पहल का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों को अनुचित ई-चालान की स्थिति से बचाना और उन्हें पूरी तरह पारदर्शी व त्वरित डिजिटल सुविधा प्रदान करना है। इस डिजिटल व्यवस्था से ट्रांसपोर्टर्स और वाहन स्वामियों को अपना परिवहन कार्य सुगमता से चलाने में बड़ी मदद मिलेगी।
इस हेल्पलाइन सेवा का दायरा केवल ई-रवन्ना तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। निदेशालय के मुताबिक, यदि राज्य में कहीं भी अवैध खनन, अवैध परिवहन, अवैध भंडारण या खनन से जुड़ी कोई भी संदिग्ध गतिविधि होती है, तो उसकी शिकायत या सूचना भी इसी हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराई जा सकती है।

