देहरादून। देहरादून में उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को राज्य लोक सेवा आयोग के सुपुर्द करने की तैयारी कर ली है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक, इसके लिए एक्ट संशोधन का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसे जल्द कैबिनेट में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। इस फैसले का सीधा असर राज्य के 21 अशासकीय कॉलेजों और हजारों उच्च शिक्षा अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
मौजूदा व्यवस्था के तहत अशासकीय अनुदानित कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति सीधे कॉलेज प्रबंध तंत्र के जरिए की जाती है। इसमें सरकार, यूनिवर्सिटी और प्रबंधन की संयुक्त चयन समिति होती थी। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार इस व्यवस्था में लंबे समय से चहेतों को तरजीह देने और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लग रहे थे।
भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार शासन तक पहुंच रही थीं। हरिद्वार के कुछ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अभ्यर्थियों से 50-50 लाख रुपये तक वसूलने की गंभीर शिकायतें दर्ज की गईं। धांधली के इन मामलों के चलते शासन को कई बार अशासकीय कॉलेजों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं पर बीच में ही रोक लगानी पड़ी थी।
भर्तियों को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सरकार ने शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही अब भर्ती नियमावली में बदलाव के लिए एक्ट संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर लोक सेवा आयोग से परीक्षा कराने के लिए कैबिनेट नोट तैयार हुआ है।
उत्तराखंड में फिलहाल 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून, डीबीएस, एमकेपी और एसजीआरआर कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं जो एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई अन्य कॉलेज राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं।
अब सरकार इन अशासकीय कॉलेजों में भी सरकारी डिग्री कॉलेजों की तर्ज पर ही पारदर्शी परीक्षाएं आयोजित कराएगी। वर्तमान में प्रदेश के 118 राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों का चयन राज्य लोक सेवा आयोग ही करता है। अब इसी पारदर्शी व्यवस्था को अशासकीय कॉलेजों में भी पूरी तरह लागू किया जाएगा।
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी ऐसी ही व्यवस्था पहले से लागू की जा चुकी है। यूपी में पहले अशासकीय कॉलेजों और इंटर कॉलेजों में प्रबंध तंत्र ही नियुक्तियां करता था, लेकिन भ्रष्टाचार रोकने के लिए वहां पृथक शिक्षा आयोग का गठन किया गया। अब उत्तर प्रदेश में भी सभी शिक्षक भर्तियां आयोग के जरिए ही संपन्न कराई जाती हैं।
उत्तराखंड सरकार के इस कड़े कदम से अशासकीय महाविद्यालयों में वर्षों से जारी मनमानी और भाई-भतीजावाद पर पूरी तरह लगाम लगेगी। कैबिनेट से एक्ट संशोधन को हरी झंडी मिलते ही लोक सेवा आयोग भर्ती प्रक्रिया का आधिकारिक विज्ञापन और गाइडलाइंस जारी करेगा। इससे प्रदेश के मेधावी और योग्य युवाओं को निष्पक्ष प्रतियोगिता का अवसर मिलेगा।

