देहरादून। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में 2024 और 2026 बैच के प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों ने राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और संस्थागत ढांचे की विस्तृत जानकारी हासिल की है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा के विभिन्न चरणों में पुलिस विभाग की अहम भूमिका और जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया।
प्रशिक्षुओं को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिवादन, राहत और पुनर्वास के तमाम पहलुओं की जानकारी दी गई। इसके साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय स्थापित करने के तंत्र और एसईओसी व डीईओसी की कार्यप्रणाली को भी करीब से समझाया गया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम की अवधारणा, चेतावनी प्रसारण तंत्र और आपदा उपरांत पुनर्वास प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नीतिगत दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन पर भी विशेष प्रकाश डाला गया।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने संबोधित करते हुए कहा कि आपदा चक्र के हर चरण में पुलिस की भूमिका अत्यंत संवेदनशील होती है। उन्होंने कहा कि आपदा के वक्त पुलिस सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाली एजेंसी है, जिसका मुख्य दायित्व मानव जीवन की रक्षा करना है।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने प्रशिक्षु अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि भविष्य में उन्हें नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभानी होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्पण, मानवीय संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की असली कुंजी है।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा और डॉ. पीडी माथुर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों में दक्ष शोखंद, लव शर्मा, अदिति पुनेठा, हिमांशु दिवाकर, आदित्य तिवारी, दिव्येश उपाध्याय, अंकित थपलियाल, समीरण भट्ट, विनय सिंह, दीप्ति कैड़ा और तनुजा बिष्ट शामिल रहे।

