नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA को UPSC जैसा ढांचा बनाने का निर्देश

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देहरादून। नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली में मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि NTA को संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर एक मजबूत, सुरक्षित और पारदर्शी ढांचा बनाना होगा। इस फैसले का सीधा असर देश भर के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों पर पड़ेगा।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षाओं में बार-बार गड़बड़ी होना पूरी व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि NTA को अब तदर्थ या अस्थायी व्यवस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसे UPSC की तरह एक जवाबदेह और स्वायत्त संस्थान बनाना ही होगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुधारों पर बड़ा अल्टीमेटम दिया है। अदालत ने सरकार से NTA सुधार के लिए गठित ‘राधाकृष्णन समिति’ और ‘नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स’ की सिफारिशें लागू करने का ब्योरा मांगा है। इसके लिए केंद्र को तीन हफ्ते के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वर्तमान परीक्षा प्रणाली का बचाव किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नीट परीक्षा प्रणाली काफी सुरक्षित है। प्रश्न बैंक तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह नहीं पता होता कि कौन सा प्रश्न अंतिम पेपर का हिस्सा बनेगा।

सरकार ने दलील दी कि प्रश्नपत्र सीसीटीवी कैमरों और सीआईएसएफ की निगरानी में प्रिंटर्स के पास भेजे जाते हैं। इसके बाद जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए प्रश्नपत्रों को बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाता है और परीक्षा के दिन ही अधिकारियों व छात्रों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ खोला जाता है।

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हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने UPSC के फुल-प्रूफ मॉडल पर जोर दिया। UPSC संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, जहां इन-हाउस प्रिंटिंग होती है और कोई बाहरी टेंडर नहीं निकाला जाता। साथ ही, परीक्षा से ठीक एक घंटे पहले एसडीएम और पुलिस बल की देखरेख में प्रश्नपत्र केंद्र तक पहुंचते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने NTA को भी ऐसा ही फुल-प्रूफ सिस्टम विकसित करने को कहा है।

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