नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान अभद्र टिप्पणी करने वाले छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माफ कर दिया है। शुक्रवार रात 11 बजे अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से 2 मिनट 54 सेकंड का भावुक वीडियो संदेश जारी कर पीएम मोदी ने कहा कि वे इन बच्चों को माफ करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने देश के नागरिकों से भी अपील की कि वे आक्रोश छोड़कर इन बच्चों को सही राह दिखाएं।
वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा है। कुछ शरारती बच्चों ने बेहद भद्दी गालियां दीं और उनकी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया, जो किसी भी सभ्य समाज के अनुकूल नहीं है। हालांकि, पीएम ने कहा कि बचपन में गलतियां होना स्वाभाविक है और इसी उम्र में सुधरने का अवसर भी मिलता है।
देशवासियों के गुस्से को समझते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वे समाज के भीतर व्याप्त आक्रोश को भली-भांति महसूस कर सकते हैं। उन्होंने बेटियों द्वारा ऐसी भाषा बोले जाने पर चिंता जताते हुए इसे ‘कल्चरल शॉक’ बताया। लेकिन उन्होंने बल दिया कि अब समय इन भटके हुए बच्चों को गले लगाने और उन्हें सही दिशा में ले जाने का है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने एक व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा कि ये भटके हुए बच्चे हमारे अपने ही हैं। जैसे कभी जीभ दांतों के बीच आकर कट जाती है, तो हम दांत नहीं तोड़ते; ठीक वैसे ही इन बच्चों को अदालतों के चक्कर कटवाने या प्रताड़ित करने से स्थिति नहीं सुधरेगी। समाज का फर्ज है कि इन्हें सही रास्ता दिखाया जाए।
प्रधानमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा, “आइए, देश के लिए मिलकर आगे बढ़ें, कुछ नया सीखें और गलतियों से सीखकर अपने सपनों को पूरा करें।” उन्होंने कहा कि वे देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह समर्पित हैं और देश को साथ मिलकर ही आगे बढ़ाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी इन दिनों इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं और देशवासियों से सीधे जुड़ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 23 जुलाई की आधी रात को पेपर लीक संशोधन बिल, 24 जुलाई को सुझावों का धन्यवाद, 26 जुलाई को कठोर कानून और 30 जुलाई को केंद्र व राज्य सरकारों की चुनौतियों पर बात की थी।
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब देश में पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार देर रात लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों से पास इस कानून में पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल की सख्त कैद का प्रावधान है।

