देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में ‘सीएम हेल्पलाइन-1905’ की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनशिकायतों के समाधान में किसी भी स्तर पर ढिलाई, शिकायतों को अकारण लंबित रखना या केवल कागजी खानापूर्ति करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को हर शिकायत का तय समयसीमा के भीतर पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के आदेश दिए। समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद शिकायतकर्ताओं से फोन पर सीधा संवाद किया।

उन्होंने ऑन-द-स्पॉट यह भी जाना कि हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई शिकायतों पर धरातल पर क्या कार्रवाई हुई है। जिन प्रकरणों में अधिकारियों द्वारा अपेक्षित और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई थी, उन पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अफसरों को तुरंत निस्तारण के निर्देश दिए। वहीं, जिन नागरिकों की समस्याओं का समाधान हो चुका था, उन्होंने फोन पर सरकार की इस त्वरित पहल के लिए आभार प्रकट किया।
बैठक में जनसमस्याओं के समाधान के साथ-साथ आधारभूत ढांचे पर भी बड़ा फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि मानसून के बाद सड़कों की स्थिति को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए। उन्होंने पूरे प्रदेश में सड़कों की मरम्मत और गड्ढा मुक्त करने के लिए 15 अक्टूबर तक की सख्त समयसीमा तय की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘सीएम हेल्पलाइन-1905’ पर दर्ज होने वाली प्रत्येक शिकायत की अब उच्च स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि कोई अधिकारी काम में लापरवाही या हीलाहवाली बरतता पाया गया, तो उसकी सीधी जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

