उत्तराखंड सरकार प्रदेश की सड़कों पर पैदल चलने वालों और गैर-यांत्रिक वाहनों (जैसे तांगा, बैलगाड़ी, हाथगाड़ी) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस नीति बनाने जा रही है। परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इस नीति का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और पैदल यात्रियों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है। इसके तहत सभी प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ बनाने, यातायात नियमों के होर्डिंग लगाने और पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने के मानक तय किए गए हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े सुधार: फुटपाथ और फुटओवर ब्रिज
सरकार की योजना के अनुसार, राज्य के सभी प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ तैयार किए जाएंगे। नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर आबादी के घनत्व को देखते हुए हर एक से तीन किलोमीटर के अंतराल पर अंडरपास या फुटओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। जहां फुटपाथ बनाना संभव नहीं होगा, वहां पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाए जाएंगे, जैसे कि वे यातायात की विपरीत दिशा में चल सकेंगे ताकि सामने से आने वाले वाहनों को देख सकें।
पैदल यात्रियों की प्राथमिकता और सुरक्षा नियम
प्रस्ताव में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताएं तय की गई हैं। जेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार करने वाले पैदल यात्रियों और गैर-यांत्रिक वाहनों को पहला अधिकार होगा। मोटर वाहन चालकों को क्रॉसिंग के स्टॉप निशान से पहले रुकना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, सुरक्षा के दृष्टिगत नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर पैदल यात्रियों और धीमी गति वाले गैर-यांत्रिक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा ताकि तेज रफ्तार वाहनों से होने वाले हादसों को रोका जा सके।
नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान
नई नीति में लापरवाही बरतने वालों के लिए भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है:
- पैदल यात्री: जेब्रा क्रॉसिंग के बजाय मनमाने तरीके से सड़क पार करने पर पहली बार 50 रुपये और दूसरी बार 100 रुपये का जुर्माना लगेगा।
- वाहन चालक: पैदल यात्रियों की प्राथमिकता के नियम को तोड़ने वाले चालकों पर पहली बार 1000 रुपये और दूसरी बार 2000 रुपये का दंड लगेगा।
- अवैध निर्माण: फुटपाथ पर अवैध विज्ञापन होर्डिंग, बैनर या निर्माण करने वालों पर पहली बार 2000 रुपये और दोबारा पकड़े जाने पर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

