उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए अभी नौ-दस महीने बाकी हैं। लिहाजा आजकल सियासी गलियारे चर्चाओं की हॉटवेव से सुलगे हुए हैं। पिछला पखवाड़ा हरीश रावत की सियासी छुट्टियों से हॉट था तो इस पखवाड़े ठंडी मसूरी सियासी दावेदारों के बयानो से गर्मा रही है। न कांग्रेस के फेहरिश्त में नाम कम है न भाजपा की सूची में।
हालांकि भाजपा के सियासी हॉल मैं मैं की गूंज गर्जना में तब्दील हो रही है। दरअसल आजकल सियासी बाजार में बेरोजगार चल रहे देहरादून के एक्स मेयर सुनील उनियाल गामा नें मसूरी सीट से हुकार भरी है। उनकी रणभेरी ने मौजूदा विधायक गणेश जोशी की नींद उड़ा दी है। पूर्व मेयर ने दो टूक कहा कि, अबकी बार गामा उम्मीदवार। क्योंकि सीट भाजपा की है किसी की खुद की नहीं। उन्होने इशारा कर दिया है कि गणेश जोशी सतर्क रहें सिटिंग विधायक समझकर खुद को सेफ न समझें दांव चला तो पैदल भी हो सकते है।
बेशक सुनील उनियाल गामा हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के राइट हैंड माने जाते हों, बावजूद इसके गणेश जोशी भी कोई कम हस्ती नहीं है मसूरी सीट पर हैवीवेट कंडीडेट हैं और तीन बार से विधायक हैं। लेकिन तय है कि इस बार जोशी को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। उसकी वजह है भाजपा का संगठन। जिसमे पन्ना प्रमुख की राय को भी तरजीह दी जाती है। उधर कांग्रेस के खेमे में भी हरक सिंह रावत ने हलचल पैदा कर दी है। हरक की ख्वाहिश भी है कि इस बार मसूरी वाले उनका दीदार करें।
अब तक देखा गया है कि हरक ने जब भी सीट बदली है ज्यादातर उन्हें जीत ही हासिल हुई है। लिहाजा माना जा रहा है कि अगर आलाकमान ने उनके समीकरण पर गौर किया तो मुमकिन है कि इस बार हरक ‘हाथ’ के साथ मसूरी की मालरोड पर दिखाई दें।
हालांकि कांग्रेस के पास जोत सिंह गुनसोला जैसे पुराने अनुभवी कार्यकर्ता भी हैं जिनको दो बार मसूरी का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। तो अनुज गुप्ता जैसे नौजवान भी जिनके प्रोफाइल को मसूरी नगरपालिका का पूर्व चेयरमैन ठप्पा हेवीवेट बनाता है। बहरहाल होगा क्या ये तो वक्त ही बताएगा फिलहाल ठंडी मसूरी सियासी चर्चाओं की हॉटवेव झेल रही है।

