उत्तराखंड सरकार राज्य में पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के लिए एक बड़ी योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत चमोली जिले के 70 गांवों में कम्युनिटी सीड बैंक (सामुदायिक बीज बैंक) स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक बीजों को संरक्षित करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। साथ ही, राज्य के वनों में मिलने वाली ‘पिरूल’ (चीड़ की सूखी पत्तियां) को भी अब आजीविका का जरिया बनाया जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
70 गांवों में सीड बैंक और पारंपरिक खेती का पुनरुद्धार
सरकार चमोली के छह ब्लॉकों (दशोली, गैरसैंण, नंदनगर, नारायणबगड़, देवाल और कर्णप्रयाग) में इस परियोजना को शुरू कर रही है। इसमें करीब 960 परिवारों को जोड़ा जाएगा और 317 हेक्टेयर क्षेत्र में मंडुवा, झंगोरा, राजमा और काला भट्ट जैसी पारंपरिक फसलों का उत्पादन होगा। यह योजना पुरानी ‘बीज विनिमय’ परंपरा को आधुनिक रूप देगी, जिससे न केवल जैव विविधता सुरक्षित रहेगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
किसानों की आय में होगा ₹75 हजार से ₹1 लाख तक का इजाफा
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई इस दो वर्षीय परियोजना से किसानों की आमदनी में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। अनुमान है कि प्रति हेक्टेयर किसानों को ₹75 हजार से ₹1 लाख तक की शुद्ध आय हो सकेगी। इसमें बीज संकलन से लेकर उनके प्रसंस्करण और विपणन के लिए पुख्ता व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिसमें किसान उत्पादक संगठनों की मुख्य भूमिका होगी।
पिरूल संग्रहण: ₹10 प्रति किलो की दर से होगी कमाई
मुख्यमंत्री धामी सरकार ने वनों की आग को रोकने और रोजगार बढ़ाने के लिए पिरूल संग्रहण की कार्ययोजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। अब पिरूल इकट्ठा करने पर ₹10 प्रति किलो का भुगतान किया जाएगा। इस पिरूल का उपयोग फायर पैलेट जैसे उत्पाद बनाने में होगा। इस योजना से विशेष रूप से महिला सहायता समूहों को जोड़ा जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को घर के पास ही आय के नए स्रोत मिल सकें।

