…तो “एक्सपायर किट” से होगी अनशनकारियों की सेहत की जांच !

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लगता है उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे को इलाज की दरकार है। आए दिन कुछ न कुछ मीडिया में सुर्खियां रहती है जो महकमे की मट्टी पलीद कर देती है। लाखों श्रद्धालुओं वाली चारधाम यात्रा के पहले दिन दो श्रद्धालुओं की मौत का दाग अभी धुल भी नहीं पाया था कि महकमें ने फिर दूसरी बड़ी चूक कर अपने पैरों में कुल्हाडी मार दी।

दरअसल देहरादून में नर्सिंग बेरोजगार वर्षवार नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। जिसके लिए देहरादून के धरना स्थल एकता विहार में धरना,प्रदर्शन और अनशन कार्यक्रम जारी है। लिहाजा नर्सिंग बेरोजगार अनशनकारियों के रूटीन हैल्थ चैकअप की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के कांधों पर है। लेकिन महकमे पर आरोप है कि जिस टीम को भेजा गया उसके पास न तो पर्याप्त उपकरण थे ना काबिल कर्मचारी। आलम ये था कि एंबुलेंस चालक अनशनकारियो का रक्तचाप नाप रहा था।

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जबकि बॉडी कीटोन जांचने के लिए जिस किट का इस्तेमाल होना था उसकी उम्र 2024 में ही पूरी हो चुकी थी। बात इतनी ही होती तो गनीमत थी लेकिन स्वास्थय महकमे की टीम के पास प्रशिक्षित नर्सिंग स्टॉफ भी नहीं था। मतलब न ताम, न झाम फिर कैसे होता काम। लिहाजा अनशनकारी और प्रदर्शनकारी स्वास्थ्य महकमे पर भड़क गए। स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही का खामियाजा सरकार को भी भुगतना पड़ा। नौकरी के लिए अनशन पर डटे नर्सिंग बेरोजगारों के गुस्से पर स्वास्थ्य महकमे की कारगुजारियों ने आग में घी डालने का काम कर दिया।

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ऐसे में स्वास्थ्य महकमें के काम-काज पर सवाल उठना लाजिम है। हालांकि अब निचले अधिकारी मामले में जांच की लीपापोती की बात कर रहे हैं। लेकिन असल सवाल ये है कि ऐसी लापरवाहियां होती क्यों हैं ? जो महकमें की शाख पर बट्टा लगा देते हैं। लिहाजा जरूरत है किसी बड़े इलाज की या ऑप्रेशन की, ताकि महकमे की सेहत दुरूस्त रह सके।