उत्तराखंड में पारा चढ़ते ही बिजली की मांग ने रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे राज्य की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। वर्तमान में प्रदेश में बिजली की मांग 4.6 करोड़ यूनिट से ऊपर पहुंच गई है, जबकि उपलब्धता कम होने के कारण यूपीसीएल को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बाजार से महंगी बिजली खरीदने के बावजूद विभाग हर दिन लगभग 14 से 15 लाख यूनिट की आपूर्ति पूरी नहीं कर पा रहा है। इस कमी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जहाँ ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मांग और आपूर्ति का बड़ा अंतर
राज्य को अपने पूल और केंद्रीय कोटे से कुल मिलाकर लगभग 2.4 करोड़ यूनिट बिजली मिल पा रही है। बाकी की कमी को पूरा करने के लिए यूपीसीएल खुले बाजार पर निर्भर है। स्थिति यह है कि 1 अप्रैल को जो कमी 1.9 करोड़ यूनिट थी, वह 17 अप्रैल तक बढ़कर 2.4 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। खुले बाजार में बिजली के दाम बढ़ने के कारण विभाग पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
सुबह और शाम की स्थिति में अंतर
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली की उपलब्धता सुबह के समय बेहतर रहती है। सुबह 7 बजे उपलब्धता लगभग 1950 मेगावाट तक होती है, लेकिन दोपहर होते-होते इसमें बड़ी गिरावट आती है और यह घटकर 1050 मेगावाट तक रह जाती है। यही कारण है कि शाम और दोपहर के समय बिजली का संकट सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है।
इन इलाकों में हो रही है सबसे ज्यादा कटौती
बिजली की कमी के चलते राज्य के कई हिस्सों में रोस्टरिंग और कटौती की जा रही है:
- हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर: यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 1 घंटा 10 मिनट से लेकर 1 घंटा 50 मिनट तक की कटौती की जा रही है।
- छोटे कस्बे और शहर: रुड़की, काशीपुर, मंगलौर, लक्सर, बहादराबाद, और जसपुर जैसे इलाकों में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक बिजली गुल रह रही है।
- औद्योगिक क्षेत्र: सेलाकुई और विकासनगर जैसे क्षेत्रों में भी आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

