उत्तराखंड सरकार राज्य के उभरते खिलाड़ियों को बेहतर भविष्य देने के लिए ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’ और ‘मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’ में महत्वपूर्ण संशोधन करने जा रही है। खेल विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव के अनुसार, अब खिलाड़ियों को केवल छात्रवृत्ति तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इन संशोधनों का उद्देश्य योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि खेल बजट का लाभ सही आयु वर्ग के पात्र खिलाड़ियों तक पहुँचे। शासन से मंजूरी मिलते ही नए सत्र में खिलाड़ियों के ट्रायल शुरू कर दिए जाएंगे।
खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना: अब 14 से 19 वर्ष के युवाओं पर फोकस
मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत अब आवेदन की ऊपरी आयु सीमा को 23 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष करने की तैयारी है। दरअसल, विभाग ने पाया कि 19 से 23 वर्ष के आयु वर्ग में खिलाड़ियों की भागीदारी कम रहती थी, जिससे सीटें खाली रह जाती थीं। इस बदलाव के बाद अब 14 से 19 वर्ष के अधिक खिलाड़ियों को मौका मिल सकेगा। इस योजना में प्रत्येक जिले से 200 खिलाड़ियों (100 बालक और 100 बालिका) को चुना जाता है, जिन्हें ₹2000 मासिक छात्रवृत्ति और सालाना ₹10,000 खेल उपकरणों के लिए दिए जाते हैं।
उदीयमान खिलाड़ी योजना: छात्रवृत्ति के साथ ऑनलाइन ट्रेनिंग
वर्ष 2022 से चल रही ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’ का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। अब इस योजना से जुड़े 8 से 14 वर्ष के नन्हे खिलाड़ियों को ऑनलाइन ट्रेनिंग की सुविधा भी दी जाएगी। वर्तमान में इस योजना के तहत हर जिले से 300 बच्चों (150 बालक और 150 बालिका) का चयन किया जाता है और उन्हें ₹1500 प्रति माह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। विभाग का मानना है कि ऑनलाइन ट्रेनिंग से दूर-दराज के क्षेत्रों के खिलाड़ी भी विशेषज्ञों से खेल की बारीकियां सीख सकेंगे।
क्यों हो रही है देरी?
नियमों के अनुसार ये योजनाएं 15 अप्रैल से शुरू हो जानी चाहिए थीं, लेकिन नियमों में संशोधन और शासन स्तर पर प्रस्ताव लंबित होने के कारण इस सत्र में अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो पाए हैं। खेल विभाग के विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा के अनुसार, जल्द ही संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी ताकि गरीब परिवारों के प्रतिभावान खिलाड़ियों को समय पर आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिल सके।

